



जयपुर स्टेशन पर शुरू होगा ‘दवा दोस्त’, यात्रियों को मिलेंगी जेनेरिक दवाएं
अगर आप ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पहुंच गए हैं। स्टेशन पहुंचने के बाद जब लगेज गिनने लगते हैं, तभी आपको याद आता है कि दवाई तो लेकर ही नहीं आए। लेकिन अब इसके चलते परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आपको स्टेशन पर ही सारी दवाई मिल जाएंगी। वो भी सभी कंपनियों की जेनेरिक दवाएं।
दरअसल 15 जनवरी तक जयपुर रेलवे स्टेशन पर पहला मेडिकल स्टोर शुरू हो जाएगा। पिछले दिनों डीआरएम नरेंद्र ने स्टेशन निरीक्षण के दौरान सीनियर डीसीएम मुकेश सैनी को स्टेशन पर मेडिकल स्टोर शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद सैनी ने इस संबंध में तुरंत टेंडर जारी किया, जिसमें ‘दवा दोस्त’ नामक निजी फर्म को मेडिकल स्टोर शुरू करने का काम भी दे दिया गया। फर्म जयपुर मंडल को सालाना 7 लाख रुपए लाइसेंस फीस का भुगतान करेगी। साथ ही सभी कंपनियों की सिर्फ जेनेरिक दवाएं ही रखेगी।
पार्सल पर लगने वाले स्टिकर से भी होगी आय
उधर डीआरएम नरेंद्र ने फाइनेंस स्किल्स से एक और नवाचार किया है। इसके तहत अब पार्सल पर लगने वाले स्टिकर से भी आय अर्जित की जाएगी। दरअसल ट्रेन से भेजे जाने वाले पार्सल पर एक स्टिकर चस्पा किया जाता है, जिस पर पूरे पार्सल का विवरण अंकित होता है। इन्हें रेलवे अभी तक बाजार से खरीदता था।
इस पर रेलवे हर साल 4.68 लाख रूपए खर्च करता था। लेकिन अब सीनियर डीसीएम मुकेश सैनी ने एक निजी फर्म से करार किया है। जिसके तहत अब यह स्टिकर निजी फर्म द्वारा निशुल्क दिया जाएगा। इस स्टिकर पर 25 फीसदी हिस्से पर विज्ञापन भी किया जाएगा। रेलवे को हर साल 1.20 लाख की लाइसेंस फीस भी मिलेगी। गौरतलब है कि इस वित्तीय नवाचार से रेलवे की हर साल 5.88 लाख रुपए की बचत होगी।
250 रुपए में होगी टू व्हीलर्स की पैकिंग
ट्रेनों में टू व्हीलर्स के अलावा अन्य माल को पैक करने के लिए लोगों से स्टेशन पर मनमाना शुल्क वसूला जाता है। इसे रोकने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे में नई व्यवस्था शुरू की गई है। रेलवे अब मंडल के सभी बड़े स्टेशनों पर टू व्हीलर्स को पैक किए जाने की भी दर तय करेगी। जयपुर स्टेशन पर इसकी शुरुआत की जा चुकी है।
इसमें टू व्हीलर्स के लिए पैकिंग की दर निर्धारित की गई है और उसे पार्सल ऑफिस में चस्पा किया जाएगा। इसमें न्यूनतम ₹250 से लेकर अधिकतम ₹450 पैकिंग चार्ज लिया जाएगा। तय शुल्क से ज्यादा पैकिंग चार्ज लिया जाएगा, तो उपभोक्ता इसकी शिकायत सीनियर डीसीएम, डीसीएम, एसीएम और सीएमआई से करेगा। जिसके बाद फर्म के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। वहीं अगर ये शिकायत बार-बार की गई, तो उस फर्म का कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया जाएगा।
