क्षेत्र के सबसे बड़े कस्बे पूगल में बारिश होते ही विद्यार्थियों को कर दी जाती है छुट्टी–विद्यालय के जर्जर भवन से हो सकता है हादसा

खाजूवाला  (मदन अरोड़ा)। राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में काफी उन्नति बताई जा रही है मगर विधायक गोविंद राम मेघवाल के पैतृक गांव पूगल में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का भवन जर्जर अवस्था में है, जो कई वर्षों से इसी हालत में भगवान भरोसे चल रहा है। स्थानीय प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। विद्यालय भवन की मरम्मत हेतु खाजूवाला पूर्व प्रधान सरिता चौहान एवं वर्तमान विधायक व कैबिनेट मंत्री गोविंद राम मेघवाल ने कई बार विद्यालय भवन मरम्मत हेतु घोषणा कर चुके हैं। पिछले साल विधायक गोविंद राम मेघवाल द्वारा अंबेडकर भवन में जन सुनवाई के दौरान रमसा योजना के तहत 50 लाख की लागत से नया भवन बनवाने की भी घोषणा की थी। मगर सभी घोषणाऐं अभी तक ठंडे बस्ते में ही पड़ी नजर आ रही है। 4 वर्ष पहले ग्राम वासियों ने व्यापार मंडल के सहयोग से चंदा एकत्रित करके ₹ 4 लाख की लागत से एक भवन जो वर्ष 1999 में बीऐडीपी योजना के तहत विश्व खाद्य योजना में बना था जिसकी छत पर टाइलें व आंगन आदि मरम्मत करवाई गई थी जो अब वापिस जर्जर अवस्था में हो चुकी है। वही अलग-अलग समय में वर्ष 1995 में व 2015 में बने 7 हॉल, प्रयोगशाला, ऑफिस व कंप्यूटर कक्ष सहित पूरे विद्यालय भवन की छत से पटियों में पानी टपक रहा है। विद्यालय स्टाफ ने उपखंड अधिकारी सीता शर्मा व सीबीईओ रामप्रताप मीणा को अवगत करवाने के बाद 5 दिनों से विद्यार्थियों की छुट्टी कर दी गई है। हल्की वर्षा होते ही छत से पानी टपकने लगता है एवं भवन से पटिया गिरने की आशंका बनी हुई है। कोई अनहोनी घटना नहीं कर सके जिस से पहले विद्यालय स्टाफ द्वारा विद्यार्थियों की अस्थाई रूप से छुट्टियां कर दी गई है। सोमवार सुबह से वर्षा का दौर शुरू हुआ जो शुक्रवार को तेज वर्षा के कारण विद्यालय परिसर पानी से लबालब भर गया। इसी विद्यालय परिसर में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय व कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास भी संचालित है जहां भी सैकड़ो बालिकाएं अध्यनरत है। छत की पटियों में पानी टपकने लगा विद्यालय प्रबंधन समिति ने विद्यार्थियों की अस्थाई छुट्टियां कर दी गई है वहीं शुक्रवार को पूरा मैदान लबालब होने के कारण 302 बालक व 326 बालिकाओं सहित कुल 628 विद्यार्थी विद्यालय में प्रवेश नहीं कर सके। कस्बे के सबसे बड़े विद्यालय में कला संकाय, विज्ञान संकाय एवं राजस्थान सरकार से हाल ही में कृषि संकाय की भी स्वीकृति मिली है। विद्यालय में छुट्टियों के कारण विद्यार्थियों का अध्ययन चौपट हो रहा है।

 

 

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