




सुन भायला आज तो राजस्थान ले डूबी नहीं भायला मै तो 10 पैसे में पाछी खा ली थी नहीं तो मरनो पड़तो
सुन भायला आज तो राजस्थान ले डूबी नहीं भायला मै तो 10 पैसे में पाछी खा ली थी नहीं तो मरनो पड़तो
बीकानेर(शिव भादाणी )। बीकानेर शहर ऐसे तो छोटी काशी के नाम जानी जाती है लेकिन पिछले कुछ वर्षाों से इसको नजर सी लग गई है। आजकल बीकानेर हथियार सप्लाई, नशा, सट्टा आदि काम को लेकर कई बार बीकानेर को शर्मसार होना पड़ा है। जहां लोग शांतिपूर्व जीना पंसद करते है वहीं कुछ बदमाश पृवत्ति के लोगों ने बीकानेर की ऐशों आराम छीन लिया है।आज अगर देखा जाया तो बीकानेर सट्टे का बड़ा घर बन गया है। यहां पर हर तरह का सट्टा होता है। सबसे बड़ा सट्टा है पर्ची सट्टा जिसमें एक रुपये के 9 रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक मिलते है। इसी लालच में मजदूर वर्ग सुबह से शाम को कमाकर आते है और सटोरियों को पूज देते है। शहर में पर्ची सट्टा करने वाले बड़े व्यापारी है छोटा काम है दिखता नहीं है लेकिन बड़े स्तर पर होता है। एक पर्ची सटोरियों ने बताया कि पहले कागज पर लिखकर रखना पड़ता था। धीर धीरे आधुनिक तरीका आया तो हम भी ऑनलाइन काम है वो भी हम स्वयं नहीं करते है इसके लिए अतिरिक्त आदमी बैठकर पर्ची भरी जाती है। अगर देखा जाये तो दिनभर में बीकानेर शहर के परकोटे के अंदर से करीब बीस से 40 लाख रुपये तक पर्ची सट्टा शहर के परकोटे के अंदर से होता है।
पर्ची सट्टे के मुख्य अड्डे
जस्सूसर गेट, कोटगेट, मटका गली, कसाईबार, तेलीवाड़ा चौक, कोतवाली थाने के पीछे, बड़ा बाजार, घुमचक्कर टैक्सी स्टेण्ड, मोहता चौक, साले की हवेली, दम्माणी चौक, नत्थुसर गेट, हरलोई हनुमान मंदिर, गंगाशहर, बड़ा बाजार में कई दुकानदार इस काम में मिले हुए है।
इसी तरह से क्रिकेट सट्टे के बड़े कारोबारी बीकानेर में जगह जगह अपने ठिकाने बना रखे है जहां से लाइन दे रखी है जिससे अब सटोरियों को पकडऩा पुलिस के लिए चुनौती बना गया है। अगर मानों तो बीकानेर में करोड़ों रुपये का व्यापार क्रिकेट से होता है। इसमें 20 से 50 साल तक के लोग जुड़े हुए है। जो क्रिकेट के शुरु होते ही टीवी के आगे बैठ जाते है।
सुन भायला आज तो राजस्थान ले डूबी नहीं भायला मै तो 10 पैसे में पाछी खा ली थी नहीं ना तो आज मरना पड़तो ऐसे वाक्या हमें रात गहराते है चाय व अन्य दुकानों पर मैच समाप्त होते ही सुनने को मिल जाते है। कई ऐसे युवाओं ने इस सट्टे के कारोबार में जान से हाथ धोना पड़ा है।
इन इलाकों में सटोरियों की भरमार
शहर में अगर देखा जाये तो परकोटे के अंदर सटोरियों की भरमार है जिसमें अगर देखा जाये तो बड़ा नाम जस्सूसर गेट, मोहता का चौक, साले की होली,बड़ा बाजार, जेल रोड, नत्थुसर गेट सहित कई ऐसे इलाके में जहां सटोरियां सुरक्षित बैठकर अपना कामकाज करते रहते है।
