सम्राट चौधरी 15 अप्रैल 2026 को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने. उनके सामने बिहार की पुरानी समस्याएं अब भी वैसी ही खड़ी हैं, जिन्हें लालू-राबड़ी, नीतीश कुमार और छोटे कार्यकाल वाले जीतन राम मांझी ने पूरी तरह हल नहीं किया. ये नेता सत्ता में रहे, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और जनसंख्या-औद्योगिक कमी जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस परिवर्तन नहीं ला सके. नतीजतन, बिहार आज भी देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शुमार है. एक्सप्लेनर में समझते हैं कि बिहार के नए CM के आगे कौन सी ’10 सम्राट’ चुनौतियां हैं…
1. शिक्षा व्यवस्था लकवाग्रस्त
बिहार में स्कूलों की संख्या 94,339 है, लेकिन 2021-22 से 2024-25 के बीच कुल नामांकन 23% घटकर 2.11 करोड़ रह गया. प्राइमरी लेवल पर नामांकन सबसे ज्यादा गिरा. ड्रॉपआउट दर ऊपरी प्राथमिक में 9.3% है. साक्षरता दर अभी भी राष्ट्रीय औसत (73%) से बहुत कम है. लालू-राबड़ी और नीतीश के दौर में स्कूल बने, लेकिन गुणवत्ता और रिटेंशन नहीं सुधरी. सम्राट चौधरी को अब इस लकवे को ठीक करना होगा.
सम्राट चौधरी कैसे सुधार सकते हैं: वे नीतीश की ‘सात निश्चय’ को तेज कर स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम, शिक्षक भर्ती और NEP 2020 के तहत फाउंडेशनल लिटरेसी पर फोकस कर सकते हैं. BJP की केंद्र योजना से फंड लेकर प्राइवेट पार्टनरशिप बढ़ा सकते हैं.
2. स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट
CAG की 2024 की ऑडिट रिपोर्ट में बिहार के सरकारी स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी साफ उजागर हुई. NFHS-5 के मुताबिक, मातृ मृत्यु दर और बच्चे की मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर है. 2026-27 बजट में 21,270 करोड़ रुपये स्वास्थ्य पर रखे गए, लेकिन अस्पतालों में बेड, डॉक्टर और दवाओं की कमी बरकरार है. पिछले नेताओं ने योजनाएं बनाईं, पर सिस्टम अभी भी कमजोर है.
सम्राट चौधरी कैसे सुधार सकते हैं: आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) को पूर्ण रूप से लागू कर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर भर्ती और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड कर सकते हैं. केंद्र से अतिरिक्त फंड लेकर जिला स्तर पर स्पेशलिस्ट अस्पताल बना सकते हैं.
3. सड़कों की खस्ता हालत
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत कुछ ग्रामीण सड़कें बनीं, लेकिन कुल मिलाकर सड़क नेटवर्क की क्वालिटी खराब है. ग्रामीण इलाकों में पक्की सड़कों की कमी, बाढ़ में टूटना और रखरखाव न होना आम है. लालू-नीतीश के लंबे शासन में भी बुनियादी ढांचा भी नहीं सुधरा.
सम्राट चौधरी कैसे सुधार सकते हैं: PMGSY-IV और एक्सेसिबल कनेक्टिविटी प्लान को तेज कर पहले से मंजूर 72 नए प्रोजेक्ट्स को पूरा कर सकते हैं. केंद्र की सड़क योजनाओं से फंड लेकर रखरखाव पर फोकस बढ़ा सकते हैं.
4. रोजगार के लिए पलायन ही आखिरी रास्ता
बिहार से 3 करोड़ से ज्यादा लोग यानी करीब 1/4 युवा बाहर काम करते हैं. दो में से तीन घरों में कम से कम एक सदस्य दूसरे राज्य में है. 2025 में भी यह ट्रेंड जारी रहा. लालू-राबड़ी और नीतीश के समय में भी लाखों युवा दिल्ली, सूरत, बेंगलुरु और मुंबई जैसे बड़े शहरों में चले गए. सम्राट चौधरी को स्थानीय रोजगार पैदा करने होंगे.
सम्राट चौधरी कैसे सुधार सकते हैं: बिहार इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पैकेज 2025 का पूरा इस्तेमाल कर 50 लाख करोड़ रुपए निवेश और 1 करोड़ नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं. MSME और फूड प्रोसेसिंग पर फोकस कर स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर फोकस जरूरी है.
5. बड़ी आबादी अभावों में गुजार रही जीवन
नीति आयोग की 2023 MPI रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में मल्टीडाइमेंशनल गरीबी दर 33.76% है, जो देश में सबसे ऊंची है. 2015-16 में 51.91% थी, यानी कुछ सुधार हुआ, लेकिन अभी भी 3.77 करोड़ लोग गरीबी में हैं. लालू-नीतीश के शासन में भी बड़ी आबादी अभाव में रही.
सम्राट चौधरी कैसे सुधार सकते हैं: केंद्र की गरीबी उन्मूलन योजनाओं, जैसे पीएम आवास, उज्जवला और आयुष्मान को 100% कवरेज देकर और स्किल डेवलपमेंट से जोड़कर गरीबी घटा सकते हैं.
6. सवालों के घेरे में महिला सुरक्षा
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) डेटा और 2025 के संसदीय जवाब में बिहार में क्राइम अगेनस्ट वीमेन के केसों में पेंडेंसी ज्यादा और कन्विक्शन रेट कम (करीब 10-11%) है. घरेलू हिंसा, बलात्कार और छेड़छाड़ के मामले लगातार रिपोर्ट होते रहते हैं. पिछले सभी मुख्यमंत्रियों के दौर में महिला सुरक्षा एक बड़ी चिंता बनी रही.
सम्राट चौधरी कैसे सुधार सकते हैं: फास्ट ट्रैक कोर्ट बढ़ाकर, महिला पुलिस स्टेशन मजबूत कर और ‘पिंक बसेस-पिंक टॉयलेट’ जैसी नीतीश योजनाओं को आगे बढ़ाकर सुरक्षा बढ़ा सकते हैं.
7. आर्थिक पिछड़ापन की समस्या
बिहार इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक, 2024-25 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय 76,490 रुपए (करंट प्राइस) है, यानी राष्ट्रीय औसत का सिर्फ 32-37%. प्रदेश की अर्थव्यवस्था 49.6% कृषि पर निर्भर है, मैन्युफैक्चरिंग पर सिर्फ 5.7% डिपेन्डेंसी है. बिहार में सेवाएं बढ़ रही हैं, लेकिन कुल मिलाकर बिहार देश के बड़े राज्यों में सबसे पिछड़ा है. लालू-राबड़ी-नीतीश के 35 से ज्यादा सालों में भी यह गैप भर नहीं पाया है.
सम्राट चौधरी कैसे सुधार सकते हैं: बिहार इंडस्ट्रियल पैकेज 2025 के तहत फ्री लैंड, कैपिटल सब्सिडी और SGST रिफंड देकर बड़े निवेश आकर्षित कर सकते हैं.
8. शहरीकरण की धीमी रफ्तार
बिहार का शहरीकरण 11-17% के बीच है, जबकि राष्ट्रीय औसत 35% है. 88% आबादी अभी भी गांवों में रहती है. नए शहर बनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन तेज विकास नहीं हुआ. इससे रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों प्रभावित हैं. पटना, गया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखती है. लालू-राबड़ी और नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल में भी शहरी विकास योजनाएं चलीं, लेकिन तेज गति से शहर नहीं बने.
सम्राट चौधरी क्या कर सकते हैं: वे स्मार्ट सिटी मिशन को और आगे बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा 11 नए सैटेलाइट शहर बनाने की योजना को प्राथमिकता दें, जिसमें छोटे शहरों जैसे बिहार शरीफ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में स्मार्ट ट्रैफिक, वाई-फाई जोन, वॉटर-सिवेज ट्रीटमेंट और हेरिटेज संरक्षण शामिल है. केंद्र की AMRUT और स्मार्ट सिटी फंडिंग के साथ 1,300 बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट्स को तेज कर छोटे शहरों में इंडस्ट्री लगाकर शहरीकरण को 20-25% तक ले जा सकते हैं.
9. बाढ़ और आपदा की आफत
2024-25 में आपदाओं में 2,547 मौतें हुईं. हर साल बिहार में बाढ़ लाखों लोगों को प्रभावित करती है. 2020-2025 के बीच 3 करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित हुए. उत्तर बिहार के 12-15 जिलों (कटिहार, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सुपौल आदि) में हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं. 2024 की बाढ़ में 7 जिलों के 2,290 घरों का सर्वे दिखाता है कि औसत नुकसान प्रति परिवार 5.51 लाख रुपये का था. लालू-नीतीश के समय में भी बाढ़ नियंत्रण एक अधूरी कहानी रहा.
सम्राट चौधरी कैसे सुधार सकते हैं: वे पुरानी एम्बैंकमेंट को मजबूत बनाने, नई ड्रेनेज सिस्टम बनाने और केंद्र सरकार की फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम को हल बना सकते हैं. इसके साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन स्कीम से अतिरिक्त फंड लेकर लंबे समय का स्थायी समाधान निकाल सकते हैं. 2024-25 की बाढ़ के सबक को लागू कर कम्युनिटी लेवल पर फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम को हर गांव तक पहुंचाएं. इससे मौतें कम होंगी, आर्थिक नुकसान घटेगा और उत्तर बिहार को बाढ़ मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे.
10. जनसंख्या दबाव और औद्योगिक विकास की कमी
जनसंख्या घनत्व 1,307 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, यानी राष्ट्रीय औसत से दोगुना. 2026 में अनुमानित जनसंख्या 13.28 करोड़ है. इसके बावजूद औद्योगिक विकास धीमा है, फैक्टरियां कम हैं और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर छोटा है. इससे रोजगार नहीं मिल रहा और पलायन बढ़ता जा रहा है.
सम्राट चौधरी कैसे सुधार सकते हैं: वे बिहार इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पैकेज 2025 (BIIPP-2025) को पूरी ताकत से लागू करें. इसमें मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए 10 एकड़ फ्री लैंड, 1 हजार करोड़ रुपए निवेश पर 25 एकड़ फ्री लैंड, 50% BIADA लैंड रिबेट, कैपिटल सब्सिडी, SGST रिफंड और स्किल डेवलपमेंट इंसेंटिव दिए जा रहे हैं. पैकेज का लक्ष्य 5 साल में 1 करोड़ नौकरियां पैदा करना है. स्किल डेवलपमेंट मिशन को तेज कर युवाओं को तैयार करें और फूड प्रोसेसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, MSME जैसे सेक्टरों में निवेश आकर्षित कर औद्योगिक बेस को मजबूत बनाएं, इससे जनसंख्या दबाव कम होगा और पलायन रुकेगा.





