समाचार पत्र युगपक्ष की स्थापना स्वनामधन्य साहित्यकार एवं पत्रकार बाबू शम्भूदयाल जी सक्सेना द्वारा की गई, जिनकी दूरदर्शिता ने इसे एक मजबूत आधार प्रदान किया। उनके ज्येष्ठ सुपुत्र, मूर्धन्य पत्रकार स्वर्गीय वीरेन्द्रकुमार जी सक्सेना ने अपने संपूर्ण जीवन को युगपक्ष के विकास और प्रतिष्ठा के लिए समर्पित कर दिया। इसके साथ ही, डॉ. राकेश जी सक्सेना ने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी सेवाओं के साथ-साथ युगपक्ष को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समय के साथ, युगपक्ष ने निष्पक्षता, विश्वसनीयता और समाज के हर वर्ग की आवाज़ को स्थान देने की अपनी परंपरा को बनाए रखा है। आज यह समाचारपत्र न केवल देश के कोने-कोने में बल्कि विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों तक भी अपनी पहुँच बना चुका है, जो प्रतिदिन इसके माध्यम से अपनी जन्मभूमि से जुड़े रहते हैं। अपने स्वर्णिम 50वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, युगपक्ष डिजिटल माध्यमों के जरिए भी लाखों पाठकों की सेवा में समर्पित है।
सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता
हम हर समाचार को बिना किसी पूर्वाग्रह के प्रस्तुत करते हैं, ताकि पाठकों को सच्ची और विश्वसनीय जानकारी मिल सके।
जन-जन तक सच्ची खबर पहुँचाना
हमारा उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक निष्पक्ष, सटीक और महत्वपूर्ण समाचार पहुँचाना है।
सत्य के साथ, समाज के साथ
हम हर परिस्थिति में सच्चाई का साथ देते हुए समाज की आवाज़ को मजबूती से उठाते हैं।