नोखा। चातुर्मास के दौरान नोखा में सत्संग कर रहे दंडी संन्यासी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने सत्संग पंडाल में दंडकवन में भगवान श्रीराम की प्रतिज्ञा ‘निशिचरहीन करहुं मही’ की ओजस्वी व्याख्या की। उन्होंने दंडकवन के ऋषि-महर्षियों तथा श्रीराम-सीता संवाद का सार बताते हुए कहा कि इन आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर आदर्श गृहस्थ बनना चाहिए। इससे राष्ट्र रक्षा का भाव स्वतः मजबूत होगा।
कार्यक्रम में करपात्री जी जयंती के प्रसंग पर विशेष आमंत्रित शिक्षाविद् जानकी नारायण श्रीमाली ने कहा कि धर्म सम्राट करपात्री जी के आह्वान पर चलाया गया गोरक्षा महाभियान सनातन धर्म के इतिहास का महान उत्कर्ष था। श्रीमाली ने करपात्री जी से जुड़े संस्मरण सुनाए, जिस पर उपस्थित विशाल जनसमूह ने हर्षनाद किया।
तुलसी जयंती पर रामचरितमानस को बताया भारत की आत्मा
तुलसी जयंती के अवसर पर जानकी नारायण श्रीमाली ने कहा कि तुलसीदास और रामचरितमानस भारत की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस विश्व में सर्वाधिक छपने और पढ़े जाने वाले धर्मग्रंथों में प्रमुख है। जहां हिंदू हैं, वहां मानस है। उन्होंने बताया कि रामचरितमानस पढ़कर सर विलियम जोन्स ने इसे हिंदुओं की ‘मृत संजीवनी’ बताया था।
श्रीमाली ने कहा कि रामचरितमानस समाज में मर्यादा और राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत करता है। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 15वीं-16वीं शताब्दी में जब मुस्लिम शासकों के अत्याचार चरम पर थे, तब तुलसी और मानस के आह्वान से हनुमान के आदर्शों से प्रेरित युवाशक्ति ने मुगल सत्ता की नींव हिला दी। इस दौरान श्रीमाली ने तुलसीदास और खानखाना रहीम के दोहों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती को भेंट किया ‘राती घाटी’ ग्रंथ
कार्यक्रम के दौरान श्रीमाली ने राती घाटी युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि राव बीकाजी के पौत्र राव जैतसी ने बाबर द्वारा राम मंदिर ध्वंस का बदला लेने के लिए बीकानेर में बाबर के पुत्र और गजनी के शासक कामरान को पराजित किया था। उन्होंने कहा कि राती घाटी युद्ध का जयघोष ‘राम! राम!’ था।
इसी अवसर पर जानकी नारायण श्रीमाली ने अपनी ‘राती घाटी युद्ध’ उपन्यास की प्रति स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती को भेंट की। मंच पर विराजमान वृद्ध दंडी संन्यासियों, तपस्वी युवा ब्रह्मचारियों और उपस्थित सैकड़ों सभासदों ने सामूहिक रूप से ‘राम! राम!’ का जयघोष किया।
— ओम नारायण श्रीमाली
महामंत्री, राती घाटी समिति, बीकानेर




