बीकानेर में गूंजा ‘वंदे मातरम’, 150वीं जयंती वर्ष पर विभिन्न विद्यालयों में हुआ सामूहिक गान

राष्ट्रीय चेतना व सांस्कृतिक गरिमा के साथ आयोजित हुआ राष्ट्रगीत वंदे मातरम जयंती समारोह -विभिन्न विद्यालयों में गुंजायमान हुआ सामूहिक गान-
भारतीय आदर्श विद्या मंदिर, रघुनाथसर के प्रांगण में राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150वें जयंती वर्ष के पावन उपलक्ष्य में प्रातः 10:00 बजे एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जी अग्रवाल, प्रबंधन समिति की सदस्या श्रीमती सरिता जी नागल ( गीता आचार्य) विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता आचार्य श्रीमती अंजली व्यास ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह अमर गीत मात्र पंक्तियाँ नहीं, बल्कि भारत माता के ‘सुजलाम्-सुफलाम् और शस्य-श्यामलाम्’ दिव्य स्वरूप का प्रत्यक्ष दर्शन और राष्ट्र-जागरण का सिद्ध मंत्र है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में लाखों बलिदानियों को मातृभूमि की सेवा हेतु सर्वस्व न्योछावर करने की संचेतना प्रदान की। उन्होंने पंच परिवर्तन एवं राष्ट्र निर्माण में हमारी सांस्कृतिक धरोहर की निरंतरता पर बल दिया। तत्पश्चात् संस्था के प्रधानाचार्य घनश्याम व्यास ने अपने बौद्धिक संबोधन में विद्यार्थियों को राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और अपने महान कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान करते हुए विचार व्यक्त किए। पूरे कार्यक्रम का कुशल एवं ओजस्वी मंच संचालन श्रीमती शारदा शर्मा द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी प्रभावी वक्तृता से समारोह को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की।
इस मुख्य समारोह के उपरांत देशप्रेम की इसी लहर को आगे बढ़ाते हुए प्रातः 11:00 बजे विद्यालय परिसर और क्षेत्र के पांच अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थानों—राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय (बारहगुवाड़), श्री गणेश विद्या मंदिर, सरस्वती शिक्षा भारती उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामेश्वर एकेडमी तथा प्ले स्कूल—में विद्यालय की ही आचार्य दीदियों और भैयाजी के नेतृत्व में कार्यक्रम का सफल आयोजन करवाया गया। ठीक 11:00 बजे इन सभी परिसरों में आचार्य दीदियों के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं, अध्यापकों व प्रबुद्ध नागरिकों ने एक स्वर में संपूर्ण ‘वंदे मातरम’ का सस्वर गान किया, जिससे पूरा क्षेत्र राष्ट्रभक्ति के परम पावन भावों और ऊर्जावान चेतना से गुंजायमान हो उठा।

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