बीकानेर। वीर दुर्गादास राठौड़ मारवाड़ के महान योद्धा, सेनापति और देशभक्त थे। उन्होंने मुगल सम्राट औरंगजेब के विरुद्ध लगभग 30 वर्षों तक संघर्ष किया। महाराजा जसवंत सिंह के निधन के बाद उन्होंने उनके पुत्र अजीत सिंह की रक्षा करते हुए मारवाड़ की स्वतंत्रता और स्वाभिमान को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह उद्गार आज वीर दुर्गादास राठौड़ की 388वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में क्षत्रिय सभा एवं ट्रस्ट, बीकानेर संभाग के उपाध्यक्ष जगमाल सिंह पायली ने अपने संबोधन में व्यक्त किए।
विशेष वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए ओंकार सिंह भाटी ने कहा कि वीर दुर्गादास राठौड़ बचपन से ही निडर, स्वाभिमानी और न्यायप्रिय थे। अपनी वीरता, बुद्धिमत्ता और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर वे महाराजा जसवंत सिंह के विशेष कृपापात्र बने। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल है।
जयंती समारोह के प्रारंभ में मंत्रोच्चारण के साथ वीर दुर्गादास राठौड़ की प्रतिमा पर पूजा-अर्चना एवं माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात उपस्थित जनसमूह ने पुष्पांजलि अर्पित कर वीर दुर्गादास राठौड़ का स्मरण किया और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर रणवीर सिंह नोखड़ा, तेज सिंह मेंलिया, भंवर सिंह भेलू, महावीर सिंह पवार, अजीत सिंह भाटी, नरेंद्र सिंह आबड़सर एवं केसरी सिंह मोटासर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
क्षत्रिय सभा एवं ट्रस्ट, बीकानेर संभाग के प्रवक्ता प्रदीप सिंह चौहान ने बताया कि समारोह में मुख्य रूप से भगवान सिंह राठौड़, ओम सिंह बिदावत, भंवर सिंह बीका, नरेंद्र सिंह बीका, लक्ष्यराज सिंह बिदासर, वीरेंद्र सिंह नरूका, गजेंद्र सिंह लूंछ, नवीन सिंह तंवर, राजपाल सिंह भाटी, संपत सिंह राजावत, गिरधारी सिंह खिंदासर, यशवंत सिंह राठौड़, नरेंद्र सिंह अरड़की, हनुमान सिंह शेखावत, दशरथ सिंह नरूका सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं समाजबंधु उपस्थित रहे।
प्रदीप सिंह चौहान
प्रवक्ता
क्षत्रिय सभा एवं ट्रस्ट, बीकानेर संभाग




