शिकायत नहीं, सहयोग : राज्य स्तरीय सम्मान से सम्मानित सीए सुधीश कुमार शर्मा की प्रेरक यात्रा
15 अगस्त को राज्य स्तरीय सम्मान से सम्मानित होने के उपलक्ष्य में यह विशेष आलेख तैयार किया गया है। यह सम्मान सीए सुधीश कुमार शर्मा की वर्षों की सामाजिक सेवा, जन-जागरूकता, नागरिक सहभागिता और राष्ट्र के प्रति समर्पित कार्यों की पहचान है। उनके व्यक्तित्व, सामाजिक सरोकारों और “आवर फॉर नेशन” अभियान के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव की उनकी यात्रा को सामने रखने के उद्देश्य से यह विशेष आलेख प्रस्तुत है।
चले थे अकेले, लोग मिलते गए और कारवां बनता गया
“अपने लिए जिए तो क्या जिए,
ऐ दिल तू जी ज़माने के लिए।”
इन पंक्तियों को यदि किसी व्यक्ति के जीवन से जोड़कर देखा जाए तो बीकानेर के चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए सुधीश कुमार शर्मा का नाम सहज ही सामने आता है।
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट, खेलों से गहरा जुड़ाव रखने वाले व्यक्तित्व और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने वाले सक्रिय नागरिक के रूप में सुधीश शर्मा ने पिछले एक दशक से अधिक समय में यह साबित किया है कि समाज में बदलाव केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों की भागीदारी से भी संभव है।
व्यस्त पेशेवर जीवन के बीच समाज के लिए समय निकालना और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना उनकी पहचान बन चुका है। उनके जीवन का मूल मंत्र है—
“शिकायत नहीं, सहयोग।”
और उनका संदेश है—
“हर सप्ताह कुछ समय राष्ट्र के नाम।”
एक विचार से शुरू हुआ सफर
वर्ष 2016 में स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरणा लेते हुए सुधीश शर्मा ने अपने कुछ साथियों के साथ विचार किया कि यदि प्रत्येक नागरिक सप्ताह में थोड़ा-सा समय अपने शहर और राष्ट्र के लिए समर्पित करे, तो समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
इसी सोच से “आवर फॉर नेशन” अभियान की शुरुआत हुई।
शुरुआत में कुछ साथी साथ आए। सफाई और श्रमदान से शुरुआत हुई। धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और एक छोटे से प्रयास ने जनभागीदारी का रूप लेना शुरू कर दिया।
आज इस अभियान का मूल संदेश है—
“हर सप्ताह कुछ समय राष्ट्र के नाम।”
सुधीश शर्मा का मानना है कि किसी व्यवस्था की कमियां गिनाना आसान है, लेकिन समाधान का हिस्सा बनना ही सच्ची नागरिक जिम्मेदारी है। इसी विचार ने उन्हें और उनके साथियों को लगातार काम करने की प्रेरणा दी।
रविवार की सुबह जब शुरू होता है एक अलग अभियान
बीकानेर शहर में रविवार की सुबह जब अधिकांश लोग अपने घरों में आराम कर रहे होते हैं, तब शहर के किसी तालाब, पार्क, सार्वजनिक स्थल या ऐतिहासिक धरोहर पर कुछ लोग झाड़ू, फावड़े और सफाई उपकरण लेकर जुटे दिखाई देते हैं।
इन लोगों के बीच एक परिचित चेहरा अक्सर नजर आता है—सीए सुधीश कुमार शर्मा।
कभी हाथ में झाड़ू, कभी फावड़ा और कभी लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी। उनके लिए श्रमदान केवल सफाई का माध्यम नहीं है, बल्कि नागरिक चेतना जगाने का प्रयास है।
उनका संदेश स्पष्ट है—शहर केवल सरकार या प्रशासन का नहीं, बल्कि यहां रहने वाले प्रत्येक नागरिक का है। इसलिए शहर को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी भी हम सभी की है।
संघर्ष से सफलता तक
सीए सुधीश शर्मा ने अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत साधारण परिस्थितियों से की। मेहनत, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और ईमानदारी के बल पर उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी के क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठित पहचान बनाई।
अपने पेशे में सफलता हासिल करने के साथ उन्होंने अनेक युवाओं का मार्गदर्शन किया। उनके मार्गदर्शन में अनेक युवा आज विभिन्न क्षेत्रों में सफल पेशेवर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
व्यावसायिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान की बीकानेर शाखा के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने व्यावसायिक शिक्षा, छात्र विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व और संगठनात्मक गतिविधियों को नई दिशा देने का प्रयास किया।
लेकिन व्यावसायिक सफलता के बावजूद समाज के प्रति उनका दायित्व हमेशा उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा।
“आवर फॉर नेशन” बना जनभागीदारी का अभियान
वर्ष 2016 में कुछ साथियों के साथ शुरू हुआ “आवर फॉर नेशन” आज अनेक लोगों को जोड़ने वाला अभियान बन चुका है।
इस अभियान से समय-समय पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी एवं पूर्व मंडल रेल प्रबंधक, भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, चिकित्सक, शिक्षाविद, उद्योगपति, व्यापारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट, युवा, विद्यार्थी और गृहणियां तक जुड़ी हैं।
अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पद और प्रतिष्ठा पीछे रह जाते हैं और समाज के प्रति जिम्मेदारी सबसे आगे होती है।
जब सभी लोग श्रमदान के लिए एक साथ खड़े होते हैं, तो कोई बड़ा या छोटा नहीं रहता। हर व्यक्ति एक समान नागरिक के रूप में समाज के लिए योगदान देता है।
“शिकायत नहीं, सहयोग” बना जीवन का मंत्र
सुधीश शर्मा का मानना है कि समाज में शिकायत करने वालों की कमी नहीं है। लेकिन यदि हर व्यक्ति केवल शिकायत करता रहे तो समाधान कैसे निकलेगा?
उनका विश्वास है कि किसी भी समस्या को देखकर यह पूछने के बजाय कि “इसे कौन ठीक करेगा?”, हमें यह सोचना चाहिए कि “मैं इसमें क्या योगदान दे सकता हूं?”
यही सोच “आवर फॉर नेशन” की आत्मा है।
इस अभियान ने लोगों को केवल सफाई के लिए नहीं जोड़ा, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी का एहसास भी कराया।
तालाबों से लेकर ऐतिहासिक धरोहरों तक
पिछले वर्षों में “आवर फॉर नेशन” के माध्यम से बीकानेर के अनेक तालाबों, जलागम क्षेत्रों, वर्षा जल के आवक मार्गों, पार्कों, सार्वजनिक स्थलों और ऐतिहासिक परिसरों में सफाई एवं जागरूकता अभियान चलाए गए।
बरसात से पहले तालाबों के जल मार्गों की सफाई, प्लास्टिक मुक्त वातावरण का संदेश, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर लगातार कार्य किया गया।
इन अभियानों का उद्देश्य केवल कचरा हटाना नहीं रहा। इसके पीछे बड़ा उद्देश्य लोगों की सोच में बदलाव लाना रहा है।
जहां अभियान पहुंचता है, वहां केवल सफाई नहीं होती, बल्कि यह संदेश भी पहुंचता है कि सार्वजनिक स्थानों की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं, हम सबकी है।
कारवां की ताकत बने साथी
सुधीश शर्मा हमेशा कहते हैं कि कोई भी सामाजिक अभियान किसी एक व्यक्ति की सफलता नहीं होता। उसके पीछे पूरी टीम का योगदान होता है।
इस यात्रा में सुशील यादव, मन्नू अरोड़ा, इंदर सिंह और डॉ. विशाल मलिक सहित अनेक साथियों ने लगातार सहयोग दिया।
इन साथियों की ऊर्जा, समर्पण और टीम भावना ने “आवर फॉर नेशन” को मजबूती दी। समय के साथ अनेक नागरिक इस अभियान से जुड़ते गए और कारवां लगातार बढ़ता गया।
यही इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता है—एक व्यक्ति की सोच को समाज की सामूहिक सोच में बदल देना।
परिवार बना सबसे बड़ा संबल
सामाजिक कार्य में निरंतर समय देना आसान नहीं होता। इसके लिए परिवार का सहयोग बेहद जरूरी होता है।
सीए सुधीश शर्मा की सामाजिक यात्रा में उनके परिवार का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। परिवार ने उनके सामाजिक सरोकारों को समझा, उनके समय और व्यस्तताओं को स्वीकार किया तथा उन्हें निरंतर नैतिक समर्थन दिया।
व्यवसाय, सामाजिक गतिविधियों और पारिवारिक दायित्वों के बीच संतुलन बनाकर चलना उनके व्यक्तित्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता रही है।
खेलों में भी बनाई विशिष्ट पहचान
सामाजिक कार्यकर्ता और चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में पहचान रखने वाले सुधीश शर्मा एक उत्कृष्ट खिलाड़ी भी रहे हैं।
उन्होंने राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए आठ बार राष्ट्रीय जिम्नास्टिक प्रतियोगिताओं में भाग लिया। राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से भी उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व किया।
खेलों से उन्हें अनुशासन, संघर्षशीलता, नेतृत्व और टीम भावना मिली। यही गुण आगे चलकर उनके सामाजिक जीवन में भी दिखाई दिए।
वर्तमान में वे बीकानेर ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के रूप में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही राजस्थान में जिम्नास्टिक के विकास और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए भी कार्य कर रहे हैं।
सामाजिक विश्वास का प्रतीक बनी जिम्मेदारियां
सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता, निष्पक्षता और सामाजिक प्रतिबद्धता के कारण उन्हें विभिन्न संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं।
वे विप्र चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, बीकानेर के अध्यक्ष के रूप में भी व्यापारिक एवं सामाजिक क्षेत्र में योगदान दे चुके हैं।
विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और नागरिक संगठनों से उनका जुड़ाव लगातार बना हुआ है।
हाल ही में उन्हें एक राजकीय महाविद्यालय की महिला शिकायत निवारण समिति में भी दायित्व दिया गया है। यह जिम्मेदारी उनके प्रति संस्थागत विश्वास और सामाजिक विश्वसनीयता को दर्शाती है।
15 अगस्त का राज्य स्तरीय सम्मान—सेवा को मिला सम्मान
15 अगस्त के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सीए सुधीश कुमार शर्मा को सम्मानित किया जाना उनकी वर्षों की सामाजिक सेवा और जनहित के कार्यों की महत्वपूर्ण पहचान है।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उस विचार का सम्मान भी है जो कहता है कि समाज में बदलाव की शुरुआत स्वयं से की जानी चाहिए।
“आवर फॉर नेशन” के माध्यम से वर्षों से लोगों को जोड़ना, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता के लिए श्रमदान करना, नागरिकों को जागरूक करना और समाज में सहयोग की भावना को मजबूत करना उनकी निरंतर सामाजिक यात्रा का हिस्सा रहा है।
राज्य स्तर पर मिला सम्मान इस यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा सकता है।
नीरज की पंक्तियां हुईं सार्थक
कवि नीरज की पंक्तियां हैं—
“कौन कहता है आसमान में छेद नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो तो सही।”
सीए सुधीश शर्मा ने भी वर्ष 2016 में एक छोटी-सी पहल के रूप में वह “पत्थर” उछाला था। तब शायद यह कल्पना भी नहीं रही होगी कि कुछ साथियों से शुरू हुआ प्रयास आगे चलकर इतना बड़ा सामाजिक कारवां बनेगा।
लेकिन निरंतरता, समर्पण और सकारात्मक सोच ने उस विचार को शक्ति दी।
आज “आवर फॉर नेशन” यह संदेश देता है कि यदि कुछ लोग ईमानदारी से शुरुआत करें और लगातार चलते रहें, तो समाज के दूसरे लोग भी उनके साथ जुड़ते जाते हैं।
एक व्यक्ति नहीं, एक विचार
आज जब समाज में समस्याओं पर चर्चा और शिकायतें बहुत हैं, लेकिन समाधान के लिए आगे आने वाले लोग अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं, ऐसे समय में सुधीश शर्मा की यात्रा प्रेरणादायक है।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि सकारात्मक बदलाव के लिए किसी बड़े पद, बड़े संसाधन या विशेष अधिकार की आवश्यकता नहीं होती।
आवश्यकता होती है—
पहल की,
संवेदनशीलता की,
निरंतरता की
और सहयोग की भावना की।
इसी सोच ने सुधीश शर्मा को केवल एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाले एक प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है।
उनकी पूरी सामाजिक यात्रा का सार दो वाक्यों में समाहित है—
“हर सप्ताह कुछ समय राष्ट्र के नाम।”
“शिकायत नहीं, सहयोग।”
चले थे अकेले, लोग मिलते गए और कारवां बनता गया।
15 अगस्त को मिला राज्य स्तरीय सम्मान उनके इसी कारवां की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि जब एक व्यक्ति अपने जीवन का कुछ समय समाज और राष्ट्र के नाम समर्पित करता है, तो उसका प्रभाव केवल उसके आसपास तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह अनेक लोगों को प्रेरित करता है।
सीए सुधीश कुमार शर्मा की कहानी एक व्यक्ति की उपलब्धियों की कहानी भर नहीं है, बल्कि यह उस विचार की कहानी है कि समाज में बदलाव की शुरुआत “किसी और” से नहीं, बल्कि “हम” से होती है।
और शायद यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है—
उन्होंने लोगों को केवल स्वच्छता का महत्व नहीं समझाया, बल्कि यह विश्वास दिलाया कि हर नागरिक बदलाव का हिस्सा बन सकता है।




