बीकानेर, (निसं.)। भक्ति जब कला से मिलती है तो उसका रूप केवल आंखों को आकर्षित नहीं करता, बल्कि मन को भी छू जाता है। बीकानेर में आयोजित विशेष धार्मिक आयोजन में आराध्य का ऐसा ही भव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 24 कैरेट शुद्ध सोने और चांदी के वर्क से सजे आराध्य के इस श्रृंगार में श्रद्धा, साधना और बारीक कलाकारी का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
आराध्य के इस विशेष श्रृंगार में 24 कैरेट शुद्ध सोने के करीब 21 वर्क और चांदी के 100 से अधिक वर्क का उपयोग किया गया है। इस मनमोहक श्रृंगार को तैयार करने में करीब 15 दिनों का समय लगा। खास बात यह है कि इस पूरी कलाकृति को कलाकार शिव-विजय श्रीमाली ने स्वयं तैयार किया है। महीन और बारीक कलाकारी के माध्यम से उन्होंने सोने और चांदी के वर्क को धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए आराध्य का मनोहारी स्वरूप तैयार किया।
इस श्रृंगार की खासियत केवल इसमें इस्तेमाल हुआ सोना-चांदी नहीं है, बल्कि इसके पीछे कलाकार की साधना और श्रद्धा भी है। हर बारीक काम में कला के साथ आराध्य के प्रति आस्था दिखाई देती है। यही कारण है कि श्रद्धालुओं के लिए यह श्रृंगार केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि भक्ति का साकार रूप बन गया है।
नौ दिनों तक भक्ति के साथ सुरों की साधना
आयोजन के दौरान पिछले नौ दिनों से प्रतिदिन रात 8:30 बजे आरती के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर भी चलता रहा। बीकानेर सहित प्रदेश और देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नामचीन कलाकारों ने स्वप्रेरणा से अपनी प्रस्तुतियां देकर धार्मिक आयोजन को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।
इन प्रस्तुतियों में मास्टर भंवर अली, नरोत्तम रंगा, आनंद सेन, यश श्रीमाली, भानु दवे, वेणुगोपाल पुरोहित और कमल श्रीमाली सहित अनेक कलाकारों ने अपनी कला की प्रस्तुति दी। भक्ति के वातावरण में संगीत और कला की इन प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को देर तक बांधे रखा।
आज महाआरती, फिर महाप्रसादी
आयोजन के समापन अवसर पर आज 23 सितंबर 2026 को महाआरती का आयोजन किया जाएगा। महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का आयोजन रखा गया है। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर महाआरती में शामिल होने और महाप्रसादी ग्रहण करने का आग्रह किया है।
इन नौ दिनों में धार्मिक आस्था के साथ कला और संगीत का जो संगम देखने को मिला, उसने आयोजन को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि बीकानेर की भक्ति, कला और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत उत्सव बना दिया। सोने-चांदी के वर्क से सजा यह श्रृंगार आने वाले समय में भी श्रद्धालुओं के लिए उस भावना की याद रहेगा, जिसमें कलाकार की कला और भक्त की आस्था एक ही जगह आकर आराध्य के चरणों में समर्पित हो गई।


