राजनीति की मर्यादा, नीति, नियम के पुरोधाअपने फर्ज को अदा करने का जो रखते है मादा संघर्षशील व्यक्ति जो पूजे जाते है अपने गुणों से ज्यादा

बात आज बीकानेर की उस शख्सियत की जिन्होंने अपने जीवन की शुरुआत भले ही छात्र राजनीति से की हो परंतु वे एक प्रोफेसर के रूप में संतोषी प्रवृत्ति से जीवन जो समझने का आनंद ले रहे थे और 1980 के दौर में इनके बड़े भाई बीकानेर की राजनीति के भीष्म पितामह की उपाधि से नवाजे गए आदरणीय जनार्दन जी कल्ला का सिक्का चलता था और जैसा मैने कहा कि बीकानेर की राजनीति उस वक्त और उसके बाद आज तक जर्नादन जी कल्ला के इर्द गिर्द ही घूमती नजर आती है बीकानेर के सपूत जो कि राज्यपाल रहे वरिष्ठ नेता रहे दिवंगत उस्मान आरिफ साब ने तत्कालीन परिस्थितियों के मध्यनजर 1980 में जनार्दन जी कल्ला को विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही और कहा कि ये लो टिकट तब राजनीति के चाणक्य और दूरदर्शी व्यक्तित्व जर्नादन जी कल्ला ने अपनी जगह प्रोफेसर बुलाकीदास कल्ला को टिकट देने की बात कही आरिफ साब थोड़ा संकुचाएं और निर्णय पर संदेह जताया लेकिन जैसा पहले बताया जर्नादन जी कल्ला दूरदर्शी थे उन्होंने उस सुनहरे अवसर को भांप लिया और ताड़ गए कि यह लंबी पारी का अवसर और इसमें सटीक व्यक्ति जो आगे तक जायेगा वो उनका छोटा भाई हो सकता है जनार्दन जी कल्ला ने जिताने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली और आरिफ साब के विश्वास को जीता और तत्कालीन चुनाव को भी उसी वक्त से राजनीति जर्नादन कल्ला जी के औरा बनकर रह गई और प्रोफेसर बुलाकीदास कल्ला जो कि एक अच्छे पढ़े लिखे संस्कारित व्यक्तित्व थे कलमकार थे वे प्रोफेसर से बी.ड़ी.कल्ला और बाद में डॉक्टर बी.डी.कल्ला के नाम और जनार्दन जी के साथ में ऐसे निखरे की आज राजस्थान ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति का चमकदार और प्रभावशाली नेतृत्व बनकर उभरे, ये थी तत्कालीन से लेकर विगत अगस्त 2026 तक की बातअब बात उस करिश्माई कार्यवाही की जिसके लिए डॉ. बुलाकीदास कल्ला युगों युगों तक याद किए जाएंगे, कलयुग में अपने बड़े भाई के लिए अपना फर्ज अदा करने वाले व्यक्तित्व के रूप में सदैव पूजे जायेंगेजी हा इस बार का निगम चुनाव आप सभी ने देखा होगा जिस तरह से राजस्थान के वरिष्ठ नेता कल्ला जी ने इस उम्र में एक जवान व्यक्ति की तरह मेहनत की संगठन के लिए संपूर्ण राजस्थान में एकमात्र महापौर देने के लिए वो काबिले तारीफ तो है ही उस से ज्यादा यह बात इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है कि जिन जनार्दन जी कल्ला ने अपने विश्वास और संपर्कों के बूते 1980 में अपनी राजनैतिक विरासत के अध्याय में डॉक्टर बुलाकीदास कल्ला को जोड़ा ठीक उसी तर्ज पर 2026 में डॉक्टर कल्ला ने अपनी अकेले की मेहनत और अपने समर्थकों की बदौलत जर्नादन जी कल्ला के सबसे लाडले (क्योंकि कहावत है कि सबसे छोटा लाडला होता है) पुत्र जो कि राजनीति के पिछले 30 वर्षों से सक्रिय भूमिका में है उनको बीकानेर के प्रथम नागरिक का ओहदा दिलाकर पुनः जर्नादन जी के चरणों में उस कड़ी को समर्पित कर दिया जो जर्नादन जी ने डॉ. कल्ला जी को दीआज बीकानेर के लाडले विकास पुरुष, वरिष्ठ राजनीतिज्ञ डॉक्टर बुलाकीदास जी कल्ला का जन्मदिवस है आपको हृदय से शुभकामनाएं देते हुए आपके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना करता हु👉साथ ही आपको हेड्स ऑफ सेल्यूट करता हु कि👈👇आप राजनीति के एक ऐसे स्वर्णीय अध्याय के पुरोधा बन गए हो जिनकी मिशाल युगों युगों तक दी जाएगीएक बार पुनः आपको जन्मदिवस की हार्दिक बधाई शुभकामनाएं – नितिन वत्स

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