MGSU: संबद्ध महाविद्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति होगी अनिवार्य

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई द्वारा हाल ही में भादरा क्षेत्र के छह संबद्ध महाविद्यालयों के किए गए आकस्मिक निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को दूर करने की दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं के समाधान तथा संबद्ध महाविद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए गठित समिति की अनुशंसाओं के अनुसार अब महाविद्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने सहित कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
शिक्षक, कार्मिक और विद्यार्थियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति
समिति की अनुशंसाओं के अनुसार सभी संबद्ध महाविद्यालयों में शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कार्मिकों तथा विद्यार्थियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इससे महाविद्यालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, शिक्षण कार्य की निगरानी करने तथा शैक्षणिक अनुशासन को मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।
प्रत्येक महाविद्यालय की अपनी वेबसाइट अनिवार्य
नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक संबद्ध महाविद्यालय को अपनी स्वतंत्र वेबसाइट विकसित करनी होगी। महाविद्यालय से संबंधित आवश्यक सूचनाएं वेबसाइट पर नियमित रूप से अपलोड एवं अद्यतन करनी होंगी। इनमें महाविद्यालय के समस्त शिक्षकों एवं कार्मिकों का विवरण, उनकी नियुक्ति एवं शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जानकारी सहित अन्य आवश्यक सूचनाएं शामिल होंगी। विद्यार्थियों के हित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होंगी, ताकि सूचनाओं तक विद्यार्थियों एवं अभिभावकों की पहुंच आसान हो सके।
विश्वविद्यालय स्तर पर होगी सीधे निगरानी
इन व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन की जांच विश्वविद्यालय स्तर पर सीधे की जाएगी। महाविद्यालयों में उपलब्ध शिक्षकों एवं कार्मिकों के विवरण, उनकी उपस्थिति तथा वेबसाइट पर अपलोड की गई सूचनाओं का सत्यापन किया जाएगा। निर्धारित नियमों एवं संबद्धता की शर्तों का पालन सुनिश्चित करना सभी संबद्ध महाविद्यालयों के लिए आवश्यक होगा।
कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए नियमित कक्षाओं के संचालन, योग्य शिक्षकों की उपलब्धता तथा आवश्यक शैक्षणिक सुविधाओं की महत्ता पर जोर दिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य संबद्ध महाविद्यालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना, नियमित शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करना तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

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