भारत की आजादी में अविस्मरणीय योगदान देने वाले तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद विषम परिस्थितियों में देश के प्रथम गृहमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर श्री जैन कन्या पी.जी. महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (रासेयो) इकाइयों द्वारा *एकता दिवस* मनाकर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. संध्या सक्सेना ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश की विपरीत परिस्थितियों में सरदार पटेल ने जिस दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता के साथ देशी रियासतों का एकीकरण कर भारत को एक सूत्र में पिरोया, वह उनकी अद्वितीय देशभक्ति और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है।
रासेयो प्रभारी डॉ. पल्लवी चौहान ने सरदार पटेल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी अदम्य इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प के कारण ही उन्हें *लौहपुरुष* कहा जाता है। उनके नेतृत्व और सूझबूझ के बिना देशी रियासतों का एकीकरण अत्यंत कठिन था।
इस अवसर पर स्वयंसेविकाओं ने भी सरदार पटेल के जीवन, विचारों एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।
रासेयो प्रभारी विशाल सोलंकी ने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। बारडोली सत्याग्रह में उनके नेतृत्व से प्रभावित होकर वहां की महिलाओं ने उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि से संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि बिखरी हुई रियासतों को एक सूत्र में बांधकर अखंड भारत के निर्माण में सरदार पटेल का योगदान अतुलनीय है। राष्ट्र सदैव उनके इस महान योगदान के प्रति कृतज्ञ रहेगा।
इस अवसर पर संकाय सदस्यो ने भी कार्यक्रम में उपस्थिति दी।
कार्यक्रम के समापन के पश्चात स्वयंसेविकाओं ने महाविद्यालय परिसर में श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश भी दिया।
साथ ही आज कंप्यूटर विभाग द्वारा *मार्केट मास्टर* विषय पर एक कार्यक्रम रखा गया जिसमें स्टूडेंट्स को अपने प्रोडक्ट को कैसे बेचे,इस पर एक प्रतिस्पर्धा भी रखी गई जिसमें विजेता को प्राचार्य द्वारा पुरस्कृत किया गया।





