20 की पानी की बोतल 35 में बेची, फरिश्ता गार्डन पर 15 हजार का हर्जाना

पंचशती सर्किल स्थित फरिश्ता गार्डन एंड कैफे रेस्टोरेंट में 20 एमआरपी वाली पानी की बोतल के 35 वसूलना रेस्टोरेंट संचालक को भारी पड़ गया। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बीकानेर के अध्यक्ष शिव शंकर और सदस्या सावित्री सुथार ने खतखाना निवासी उपभोक्ता परिवादी हिमांशु गौतम के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेस्टोरेंट को 15 की अधिक वसूली लौटाने के साथ 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 10 हजार मानसिक एवं आर्थिक क्षति तथा 5 हजार परिवाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया है। यानी केवल 15 की अधिक वसूली के मामले में रेस्टोरेंट पर कुल 15 हजार का अतिरिक्त हर्जाना-खर्च लगाया गया।

पत्नी के साथ डिनर पर गए थे, 840 का बिल दिया
निर्णय के अनुसार परिवादी हिमांशु गौतम 28 जून 2025 को अपनी धर्मपत्नी के साथ फरिश्ता गार्डन रेस्टोरेंट में डिनर करने गए थे। रेस्टोरेंट में उन्हें टेबल नंबर 6 पर सेवा दी गई। भोजन एवं पेय पदार्थों का सेवन करने के बाद रेस्टोरेंट ने परिवादी को 840 का बिल जारी किया। बिल देखने के बाद परिवादी को पता चला कि रेस्टोरेंट ने पानी की बोतल के लिए 35 वसूल किए हैं, जबकि बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य यानी 20 अंकित था। आपत्ति की तो कथित तौर पर बुरा-भला कहा गया। निर्णय में दर्ज परिवादी के कथन के अनुसार, जब उन्होंने पानी की बोतल के 35 लिए जाने पर आपत्ति की तो रेस्टोरेंट की ओर से उन्हें बुरा-भला कहा गया। परिवादी ने 15 राशि वापस करने के लिए विधिक नोटिस भी दिया, लेकिन रेस्टोरेंट की ओर से नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया और राशि भी वापस नहीं की गई।

इसके बाद हिमांशु गौतम ने अपने अधिवक्ता अनिल सोनी और शिव कुमार के मार्फत उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया। रेस्टोरेंट पक्ष नोटिस के बावजूद आयोग में नहीं पहुंचा। निर्णय के अनुसार परिवाद का नोटिस विपक्षी को जारी किया गया, लेकिन तामील के बावजूद विपक्षी उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद 20 नवंबर 2025 को विपक्षी के विरुद्ध एकतरफा कार्यवाही शुरू की गई। परिवादी हिमांशु गौतम ने स्वयं का शपथ-पत्र तथा संबंधित दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश किए। आयोग ने रेस्टोरेंट द्वारा जारी बिल दिनांक 28 जून 2025 का अवलोकन किया। आयोग ने माना कि बिल से स्पष्ट है कि पानी की बोतल के लिए 35 वसूल किए गए, जबकि परिवादी के अभिकथन एवं साक्ष्य के अनुसार बोतल का एमआरपी 20 था।

आयोग ने माना कि रेस्टोरेंट द्वारा एमआरपी से अधिक राशि वसूल करना सेवादोष एवं अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने आदेश दिया कि विपक्षी परिवादी को पानी की बोतल के बदले वसूली गई अतिरिक्त 15 राशि, 28 जून 2025 से 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित लौटाए। इसके अलावा परिवादी को हुई मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 10 हजार तथा परिवाद व्यय के रूप में 5 हजार भी अदा करने होंगे। परिवादी हिमांशु गौतम की ओर से अधिवक्ता अनिल सोनी एवं शिव कुमार ने पैरवी की।

ग्राहक से 15 की अतिरिक्त वसूली को मामूली समझना रेस्टोरेंट को भारी पड़ सकता है। आयोग ने इस मामले में केवल अतिरिक्त राशि लौटाने तक सीमित न रहते हुए मानसिक क्षति और मुकदमे के खर्च की भी भरपाई का आदेश दिया है।

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