अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर भाषणों की भरमार

पर्यावरण पोषण यज्ञ समिति द्वारा आयोजित *मनुस्मृति समर्थन या विरोध कितना उचित?* दो दिवसीय विचार गोष्ठी के दूसरे दिन तृतीय चतुर्थ सत्र में आज वक्ताओं ने खुलकर पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचारों को व्यक्त किया। प्रबुद्ध वक्ताओं के अनुसार मनुस्मृति धर्मशास्त्र भी है, अर्थशास्त्र भी है, एवं दंड शास्त्र भी है। देश,काल एवं स्थिति के अनुसार ही किसी भी परिस्थिति की विवेचना करनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि आज स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के नाम पर समाज में कुछ भी कहने की स्वतंत्रता प्रदान करना भी उचित नहीं है अभिव्यक्ति की भी एक सीमा होती है जिससे समाज का अहित न हो। वक्ताओं ने आज के समाज की विषमताओं को भी व्यक्त किया। समाज में वर्ण अनुसार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मनुस्मृति में प्रदान की गई थी जिसका उद्देश्य विशेषज्ञ को समाज के समक्ष अपने विचारों को अभिव्यक्त कर शिक्षा एवं संस्कारों का प्रचार प्रसार करना था परंतु आज के संदर्भ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर जो परोसा जा रहा है क्या वह समाज एवं युवा पीढ़ी के लिए उपयुक्त है इस पर भी विचार व्यक्त किए गए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता आचार्य रविंद्र ने तथा संचालन आचार्य शिवनाथ ने किया जबकि द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉक्टर सुरेंद्र कुमार एवं संचालन डॉक्टर दीपक आर्य ने किया। आज के दोनों सत्रों में मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर शत्रुंजय, डॉक्टर पुनीत चोपड़ा, ऋतु शर्मा, आचार्य रवि शंकर, आचार्या शीतल, मुनि सत्यजीत, आचार्य रविंद्र, आचार्य डॉ निरंजन लाल आदि ने विस्तृत रूप से मनुस्मृति के संदर्भ में श्रोताओं की भ्रांतियां को दूर किया तथा जिज्ञासाओं को भी शांत किया। जो मनुस्मृति का समर्थन करते हैं क्या वह उसे 100% मानते हैं तथा जो नहीं मानते क्या वह 100% विरोध में है इस पर भी विचार किया गया। विपक्ष का मत था की जब भारतीय संविधान समानता का अधिकार प्रदान करता है तो किसी ग्रंथ की तरफ लौटना क्या जरूरी है? स्त्री शिक्षा, समाज में स्त्रियों की उचित स्थिति का समर्थन किया जाता है परंतु सदैव इसका तुलनात्मक रूप में अध्ययन किया जाता है। सामान्यतः स्त्री दो कूलों की मर्यादा होती है। मनुस्मृति का सही संदेश सामान्य जन तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है जिससे व्याप्त भ्रांतियां को दूर किया जा सके। स्वतंत्रता एक निर्धारित सीमा और समय तक उचित है परंतु सीमा का उल्लंघन होने पर इसका भी दुरुपयोग संभव है। मनुस्मृति द्वारा बहुत बड़ा दायित्व प्रदान किया गया है। प्रदूषण एवं पर्यावरण के संदर्भ में भी वक्ताओं ने मनुस्मृति के संदर्भ में अपने विचारों को अभिव्यक्त किया। शिक्षाविद स्वर्गीय रामनारायण स्वामी की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।सत्संग एवं भजन संध्या के साथ कार्यक्रम के अंत में पधारे हुए विद्वानों का आर्ष न्यास एवं वैदिक शोध संस्थान के पदाधिकारियों द्वारा सम्मान किया गया एवं उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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