संकाय अभिमुखीकरण कार्यक्रम  राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर

राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर में इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल के तत्वावधान में वर्ष 2023 के पश्चात नियुक्त हुए नवीन संकाय सदस्यों के लिए द्विदिवसीय संकाय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवनियुक्त सह आचार्यों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020), भारतीय ज्ञान प्रणाली (BKS), महाविद्यालय की शैक्षणिक विकास यात्रा, प्रशासनिक व्यवस्था तथा संस्थान की विशिष्ट उपलब्धियों से परिचित कराना था।

कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राजेन्द्र कुमार पुरोहित ने समस्त नवीन संकाय सदस्यों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार एवं सतत् सीखने की भावना के साथ स्वयं के शैक्षणिक विकास के साथ साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अपनी प्रभावी भूमिका निभाने हेतु प्रेरित किया।

प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. अन्नाराम शर्मा ने उच्च शिक्षण संस्थान में संस्थापन प्रबंधन के अंतर्गत तकनीकी पक्ष एवं नवाचारों से नवनियुक्त संकाय सदस्यों को परिचित करवाया।

इसके पश्चात विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रो स्मिता जैन ने भी नवीन संकाय सदस्यों का मार्गदर्शन करते हुए महाविद्यालय की शैक्षणिक संस्कृति, अनुशासन एवं शिक्षकों की जिम्मेदारियों पर अपने विचार साझा किए।

तकनीकी सत्र के अंत में प्रो चन्द्रशेखर कच्छावा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति ने उच्च शिक्षा में बहुविषयक अध्ययन, कौशल विकास, शोध एवं नवाचार को विशेष महत्व दिया है तथा महाविद्यालय स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रो नरेंद्र भोजक ने महाविद्यालय की स्थापना से लेकर आज तक की विकास यात्रा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने महाविद्यालय द्वारा लगातार तीन बार NAAC में A+ ग्रेड प्राप्त करने की उपलब्धि, संस्थान के समृद्ध शैक्षणिक एवं भौतिक अधोसंरचना, विभिन्न प्रयोगशालाओं, कक्षों, पुस्तकालय तथा अन्य सुविधाओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान कार्यशाला कॉर्डिनेटर के रूप में डॉ हेमेन्द्र भंडारी ने नवीन संकाय सदस्यों के साथ संवाद स्थापित करते हुए उनके अनुभव, जिज्ञासाओं एवं अपेक्षाओं पर चर्चा की तथा शिक्षण कार्य से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
तकनीकी सत्र के अंत में डॉ सुरेश वर्मा द्वारा कैरियर एडवांसमेंट स्कीम एवं उच्च शिक्षा में संकाय सदस्यों के अकादमिक विकास की विभिन्न गतिविधियों से नवनियुक्त संकाय सदस्यों को अवगत करवाया।

कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. देवेश सहारण एवं डॉ रवि परिहार ने अत्यंत प्रेरणादायक संबोधन दिये। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षक की वास्तविक पहचान उसका पद नहीं, बल्कि उसकी शिक्षण क्षमता, विद्यार्थियों से जुड़ाव और कक्षा में दिया गया समय होता है। उन्होंने सभी शिक्षकों से अधिक से अधिक कक्षाएँ लेने, विद्यार्थियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने तथा एक आदर्श शिक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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