बीकानेर, 30 जुलाई। भारतीय सेना के अदम्य साहस और पराक्रम के प्रतीक ‘कारगिल विजय दिवस’ के उपलक्ष्य में ‘कारगिल योद्धा सम्मान समारोह’ का आयोजन शिविका गार्डन में किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना और जीवित योद्धाओं (वेटरंस) को उनके असीमित योगदान के लिए सम्मानित करना था।
इस अवसर पर मरुधर बीकाणा महासंघ की ओर से पूर्व कर्नल प्रहलाद सिंह राठौड़ का सम्मान किया गया। इस दौरान पूरा सभागार ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष से गूंज उठा।
कर्नल राठौड़ ने अपने सम्मान के लिए मरुधर बीकाणा महासंघ का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी तथा वे सैनिकों के प्रति कृतज्ञ होंगे। उन्होंने कहा कि कारगिल के दुर्गम पहाड़ों पर हमारे सैनिकों ने जो विजय गाथा लिखी, वह इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। हमें अपने वीर सैनिकों के बलिदान पर गर्व है और यह हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम उनके परिवारों का सदैव सम्मान करें।
इस अवसर पर मरुधर बीकाणा महासंघ के अध्यक्ष श्याम तंवर और उपाध्यक्ष डॉ. सतीश कच्छावा ने कर्नल राठौड़ के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह दिन उन वीर सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को याद करने का दिन है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना भारत की सीमाओं की रक्षा की। हमें उनके साहस पर हमेशा गर्व रहेगा। द्रास की बर्फीली चोटियां आज भी उस संघर्ष की गवाह हैं, जहां भारतीय सैनिकों ने असंभव दिखने वाली परिस्थितियों में भी विजय हासिल की।
कारगिल विजय केवल एक युद्ध की जीत नहीं थी, बल्कि यह पूरे विश्व के सामने भारत के साहस, संयम और दृढ़ संकल्प का परिणाम थी।
सम्मान समारोह में मरुधर बीकानेर महासंघ के कोषाध्यक्ष दुष्यंत तंवर,पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामनिवास मीणा, ओम सोनी, पूर्व सचिव बीडीए मनोहर सिंह, डॉ. टी.के. गहलोत, श्याम पड़िहार, राजेंद्र भार्गव, ओम सोनी, टेन्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, पूर्व प्राचार्य यशपाल आचार्य, मोहम्मद रफीक, सहायक निदेशक राजेंद्र तंवर, उद्योगपति सुनील गहलोत, लोकेश सीरिया, प्रवीण अरोड़ा, सुनील कनौजिया ने राठौड़ का सम्मान किया।





