नोखा। अपना घर आश्रम नोखा में रविवार को एक भावुक मिलन हुआ, जिसने वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। करीब आठ वर्षों से परिवार से बिछड़े अशोक प्रभुजी आखिरकार अपने भाई धर्मेंद्र और परिवार से मिल गए। इस मिलन की कड़ी सोशल मीडिया पर प्रसारित एक छोटी-सी रील बनी, जिसने वर्षों से भाई की तलाश कर रहे परिवार को उसकी खोई खुशियां लौटा दीं।
अशोक प्रभुजी मूल रूप से बिरदा गांव, ललितपुर, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। वर्ष 2018 में वे रोजमर्रा के काम के सिलसिले में एक दुकान पर गए थे, लेकिन शाम को वापस घर नहीं लौटे। बोलने और सुनने में असमर्थ होने के कारण परिवार के लिए उनकी तलाश करना और भी मुश्किल हो गया। बुजुर्ग मां, भाई धर्मेंद्र और परिवार के अन्य सदस्यों ने कई स्थानों पर उनकी तलाश की तथा पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई, लेकिन लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला।
मुश्किल दौर में भी नहीं छोड़ी तलाश: समय बीतता गया। वर्ष 2022 में अशोक प्रभुजी की भाभी का निधन हो गया। उनका छोटा भाई भी उन्हें तलाशते-तलाशते कहीं चला गया और उसका भी पता नहीं चल सका। ऐसे कठिन समय में बड़े भाई धर्मेंद्र ने परिवार और बुजुर्ग मां की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन अशोक की तलाश की उम्मीद कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
रेलवे स्टेशन से मिला था आश्रय: 19 नवंबर 2022 को अशोक प्रभुजी को बीकानेर रेलवे स्टेशन से रेस्क्यू किया गया और अपना घर आश्रम बीकानेर लाया गया। बाद में उन्हें अपना घर आश्रम नोखा स्थानांतरित किया गया। आश्रम में उन्हें भोजन, आवास, चिकित्सा और आवश्यक देखभाल उपलब्ध करवाई गई। अशोक प्रभुजी अपने परिवार, गांव और पते के बारे में स्पष्ट जानकारी देने में सक्षम नहीं थे। ऐसे में उनके परिजनों तक पहुंचना चुनौती बना रहा।
19 अगस्त की रील बनी मिलन की वजह: कहानी में नया मोड़ 19 अगस्त 2026 को आया। अपना घर आश्रम नोखा ने इंस्टाग्राम पर अशोक प्रभुजी की एक रील साझा की। संयोग से उनके गांव के रहने वाले रामपाल की नजर उस रील पर पड़ी। उन्होंने अशोक प्रभुजी को पहचान लिया और तत्काल उनके भाई धर्मेंद्र को इसकी जानकारी दी।
जैसे ही धर्मेंद्र को वर्षों से बिछड़े भाई के अपना घर आश्रम नोखा में सुरक्षित होने की खबर मिली, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बुजुर्ग मां और परिजनों की आंखों में वर्षों के इंतजार के बाद खुशी के आंसू छलक पड़े।
आमने-सामने आए तो छलक पड़े भाव: धर्मेंद्र बिना देर किए अपना घर आश्रम नोखा पहुंचे। वर्षों बाद दोनों भाइयों का आमना-सामना हुआ तो माहौल बेहद भावुक हो गया। भाई ने अशोक प्रभुजी को अपने साथ ले जाने की प्रक्रिया पूरी की और आश्रम प्रबंधन का आभार जताया। धर्मेंद्र ने कहा कि परिवार ने अशोक को पाने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी थी। इतने वर्षों बाद उनका सुरक्षित मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
इसके बाद अशोक प्रभुजी अपने भाई धर्मेंद्र के साथ खुशी-खुशी अपने गांव बिरदा, ललितपुर (उत्तर प्रदेश) के लिए रवाना हो गए।


