भाग्य, धन, वैभव, विवाह और धर्म के कारक हैं बृहस्पति, एक राशि में 12 महीने तक रहते हैं
बीकानेर। 2 जून 2026 यानि मंगलवार से ज्ञान, भाग्य, अध्यात्म, धन और संतान के परम कारक देवगुरु बृहस्पति अपने पुराने घर को छोड़कर अपनी सबसे प्रिय और उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हैं। गुरु पूरे 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कर्क राशि में आ रहे हैं। कर्क एक जल तत्व की राशि है और चंद्रमा इसके स्वामी हैं, इसलिए इस राशि में आते ही बृहस्पति अपने सबसे बलवान और चेष्टावान स्वरूप में आ जाते हैं। गुरु का यह उच्च अवस्था में जाना पूरी दुनिया में एक बड़े वैचारिक और आध्यात्मिक बदलाव का संकेत है। विशेष रूप से मेष, मिथुन, कर्क और मीन राशि के जातकों के लिए यह गोचर जीवन की दिशा और दशा बदलने वाला टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। सौरमंडल में देव गुरु बृहस्पति को सबसे विशाल ग्रह माना गया है। इनकी चाल धीमी होती है। यह एक राशि में लगभग 12 महीने तक रहते हैं। गुरु एक जून की देर रात 1:50 बजे कर्क में राशि में प्रवेश कर गए हैं। बृहस्पति को भाग्य, धन, वैभव, विवाह और धर्म के कारक हैं। गुरु धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। कर्क इनकी उच्च राशि है व मकर राशि में ये नीच के माने जाते हैं। धनु बृहस्पति की मूल त्रिकोण राशि भी है। गुरु किसी एक राशि में करीब 13 माह तक वास करते हैं और 12 राशियों का भ्रमण चक्र पूरा करने में इन्हें 12 साल का समय लगता है। इसीलिए किसी एक राशि में दोबारा आने में गुरु को पूरे 12 वर्ष लगते हैं।
मेष राशि (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो)
देवगुरु बृहस्पति मेष राशि में चौथे भाव में गोचर करने जा रहे हैं, जिसे सुख, माता, भूमि और वाहन का घर माना जाता है। इस अवधि में आपके कार्यक्षेत्र में जबरदस्त उछाल आएगा। नौकरीपेशा लोगों को मनचाहा ट्रांसफर या प्रमोशन मिल सकता है। समाज में आपका मान-सम्मान और रुतबा बढ़ेगा। पारिवारिक सुखों में भारी वृद्धि होने वाली है। लंबे समय से अटका हुआ नया घर खरीदने या नई गाड़ी लेने का सपना इस दौरान पूरा होगा।
वृषभ राशि (ई, उ, ए, ओ, वा, वि, वू, वे, वो)
बृहस्पति देव मेष राशि से तीसरे भाव में प्रवेश करेंगे, जिसे पराक्रम, साहस, छोटे भाई-बहन और संचार का भाव कहा जाता है। लेखन, पत्रकारिता, मार्केटिंग और कंसल्टेंसी के क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी कला के दम पर बड़ी सफलता हाथ लगेगी। इस दौरान आपकी छोटी लेकिन बेहद लाभदायक व्यावसायिक यात्राएं होंगी। छोटे भाई-बहनों के साथ यदि कोई मनमुटाव चल रहा था, तो वह समाप्त होगा आपका झुकाव धार्मिक यात्राओं और परोपकार के कार्यों की तरफ बढ़ेगा।
मिथुन राशि (का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, ह)
मिथुन राशि के जातकों के लिए देवगुरु का यह गोचर उनके दूसरे भाव में होने जा रहा है, जिसे धन, पैतृक संपत्ति, परिवार और वाणी का स्थान माना जाता है। आर्थिक मोर्चे पर यह समय आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यदि आपका पैसा कहीं लंबे समय से फंसा हुआ था या डूब चुका था, तो वह इस दौरान वापस मिल जाएगा। आय के नए स्रोत बनेंगे। व्यापारियों को निवेश से भारी मुनाफा होने के संकेत हैं। परिवार में चल रहे पुराने विवाद सुलझेंगे और घर में किसी मांगलिक या शुभ कार्य का आयोजन होने के प्रबल योग बनेंगे।
कर्क राशि (ही, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय उनके जीवन का स्वर्णिम काल कहा जा सकता है, क्योंकि बृहस्पति आपकी ही राशि में यानी आपके पहले (लग्न) भाव में आ रहे हैं, जहाँ वे पूरी तरह उच्च के हो जाते हैं। आपके व्यक्तित्व में एक अलग ही तेज और आकर्षण देखने को मिलेगा। समाज के संभ्रांत और उच्च पदों पर बैठे लोगों से आपके संपर्क स्थापित होंगे। स्वास्थ्य से जुड़ी हर पुरानी समस्या से आपको निजात मिलेगी। वैवाहिक जीवन में यदि कड़वाहट या दूरियां आ गई थीं, तो वे प्यार और आपसी समझ में बदल जाएंगी। जीवनसाथी के भाग्य से भी आपको धन और करियर में लाभ मिलेगा।
सिंह राशि (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
सिंह राशि के जातकों के लिए बृहस्पति देव का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में होने जा रहा है, जिसे व्यय (खर्च), विदेश और मोक्ष का भाव माना जाता है। विदेशी व्यापार से आपको उम्मीद से बढ़कर लाभ होगा। इस दौरान आपके खर्चों में बढ़ोतरी होगी, लेकिन ये खर्चे किसी बीमारी पर न होकर शुभ कार्यों, घर के रेनोवेशन या तीर्थ यात्राओं पर होंगे। आपका झुकाव भौतिक सुखों से हटकर अध्यात्म, ध्यान और योग की तरफ तेजी से बढ़ेगा।
कन्या राशि (टो, प, पी, प्री, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
कन्या राशि के जातकों के लिए देवगुरु का यह गोचर आपके ग्यारहवें भाव में होने जा रहा है, जिसे लाभ, आय और इच्छा पूर्ति का भाव माना जाता है। यह गोचर आपकी आमदनी की रफ्तार को दोगुना कर देगा। लंबे समय से रुके हुए प्रोजेक्ट्स दोबारा शुरू होंगे और उनसे आपको बंपर आर्थिक लाभ होगा। यदि आप प्रॉपर्टी अथवा किसी अन्य में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह समय आपको बड़ा मुनाफा देकर जा सकता है। बड़े भाई-बहनों और मित्रों का हर मोड़ पर सहयोग मिलेगा। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और नए प्रभावशाली मित्र बनाएंगे।
तुला राशि (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
तुला राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का गोचर उनके दसवें भाव में होगा, जिसे कर्म, करियर, व्यवसाय और पिता का स्थान कहा जाता है। आपके पेशेवर जीवन में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव आने वाला है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन मिलेगा, यदि आप नई नौकरी की तलाश में हैं, तो बड़े ब्रांड्स से आपको ऑफर मिल सकते हैं। कार्यस्थल पर आपके सीनियर्स और बॉस आपके काम के मुरीद रहेंगे। पिता या पैतृक सहयोग से आपको अपने बिजनेस में कोई बड़ी डील, सम्पति हासिल हो सकती है।
वृश्चिक राशि (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए देवगुरु का गोचर उनके नौवें भाव में होने जा रहा है, जिसे भाग्य, धर्म और उच्च शिक्षा का भाव माना जाता है। इस गोचर के प्रभाव से आपका सोया हुआ भाग्य पूरी तरह से जाग उठेगा। उच्च शिक्षा या सरकारी नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इस अवधि में बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। परिवार के साथ किसी लंबी दूरी की सुखद यात्रा या प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के दर्शन करने के प्रबल योग बन रहे हैं। समाज में ख्याति बढ़ेगी।
धनु राशि (ये, यो, भ, भी, भू, ध, फ, ढ, भे)
धनु राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का गोचर आठवें भाव में होने जा रहा है, जिसे आयु, संकट, गुप्त विद्या और अचानक होने वाले लाभ-हानि का भाव माना जाता है। यह समय आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आ रहा है। आर्थिक मोर्चे पर आपको सावधान रहने की जरूरत है, हालांकि पैतृक संपत्ति के माध्यम से आपको अचानक से कोई बड़ा धन लाभ भी हो सकता है। अपने स्वास्थ्य का ध्यान विशेषकर खान-पान पर नियंत्रण रखें, अन्यथा पेट, लीवर या मोटापे से जुड़ी समस्याएं आपको परेशान कर सकती हैं। वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
मकर राशि (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, ग, गी)
मकर राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति का गोचर सातवें भाव में होने जा रहा है, जिसे विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी और दैनिक रोजगार का भाव माना जाता है। जो जातक लंबे समय से सिंगल हैं या जिनके विवाह में लगातार अड़चनें आ रही थीं, उनके लिए अब शहनाइयां बजने का समय आ चुका है। शादीशुदा जीवन में चल रहे पुराने तनाव और गलतफहमियां दूर होंगी और आपसी प्रेम बढ़ेगा। समाज में आपकी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से ऊपर जाएगा।
कुंभ राशि (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, द)
कुंभ राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का यह गोचर छठे भाव में होने जा रहा है, जिसे रोग, ऋण (कर्ज), और शत्रुओं (विरोधियों) का घर माना जाता है। विरोधी परास्त होंगे, कोर्ट कचहरी में चल रहा मामला आपके पक्ष में आएगा। जो लोग नौकरी बदलने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें सफलता मिलेगी। पुराने कर्ज से मुक्ति पाने के रास्ते मिल जाएंगे। स्वास्थ्य के प्रति आपको लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी है।
मीन राशि (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची )
मीन राशि के जातकों के लिए बृहस्पति का गोचर पांचवें भाव में होने जा रहा है, जिसे संतान, बुद्धि, उच्च शिक्षा और प्रेम संबंधों का भाव माना जाता है। विद्यार्थियों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। संतान सुख मिलेगा, प्रेम संबंधों के लिहाज से यह समय बेहद रोमांटिक और प्रगाढ़ता लाने वाला रहेगा। आपकी रचनात्मकता और कलात्मक क्षमता अपने चरम पर होगी, जिससे आपको अपने कार्यक्षेत्र में विशेष पहचान और पुरस्कार मिल सकता है।





