24 जून 2026, बुधवार को बटुक भैरव जयंती व गंगा दशहरा की विशेष तिथि है। कलियुग में बाबा बटुक भैरव की साधना सबसे अधिक प्रभावशाली और तत्काल फल प्रदान करने वाली मानी गई है। पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में ‘आपाद’ नाम के क्रूर दैत्य ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया था।
सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे। महादेव के मुखमंडल से करोड़ों सूर्यों के समान एक तेज पुंज प्रकट हुआ। इसमें अन्य देवताओं की शक्तियां भी समाहित हो गईं। यह अलौकिक तेज 5 वर्ष के तेजस्वी बालक के रूप में परिवर्तित हो गया। शिव (रुद्र) के तेज से उत्पन्न होने के कारण बालक का नाम भैरव पड़ा। बाल रूप में वे बटुक भैरव कहलाए। इस बालक ने दैत्य आपाद का वध कर देवताओं को भयमुक्त कर दिया। देवताओं को आपदा से उबारने के कारण उन्हें ‘आपदुद्धारक बटुक भैरव के नाम से पूजा जाने लगा।
बटुक भैरव जयंती पर सुगंधित द्रव्यों, पंचामृत और गंगाजल से बटुक भैरुनाथ का अभिषेक करना चाहिए। छप्पन भोग का नैवेद्य अर्पित किए जाएं। शाम को भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना अथवा दीपमाला करना शुभदायी है। सिंदूर, चमेली के तेल व मालीपाना से शृंगार करने से भय दूर होता है। बीमार या असहाय श्वान (कुत्ते) की सेवा करनी चाहिए। उसके लिए रोटी, पानी व चिकित्सा की व्यवस्था करनी चाहिए।
बुधवार को गंगा दशहरा है इसलिए गंगा अथवा किसी पवित्र नदी में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसा संभव नहीं हो तो घर पर स्नान के पानी में गंगा जल डालकर नहा सकते हैं। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करना श्रेष्ठ है।





