केसर-जल और जड़ी-बूटियों से हुआ अभिषेक, रत्नेश्वर धाम में गूंजे बम-बम भोले

बीकानेर। सावन के पवित्र माह के अवसर पर मरू नायक बगीची स्थित प्राचीन रत्नेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जड़ी-बूटियों एवं केसर मिश्रित जल से विधिवत सहस्त्र घट अभिषेक किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, भगवान शिव के जयकारों और भक्ति गीतों से वातावरण शिवमय हो गया।“भवसागर से मुक्ति को पार लगाएं, शिव शंकर डमरू वाले” की भावना के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ की आराधना की और सुख-शांति एवं मोक्ष की कामना की।अभिषेक कार्यक्रम में मुख्य रूप से पंडित गोविंद जोशी एवं पंडित मदन किराडू ने पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए। वहीं राजेश कच्छावा ने मधुर भजनों एवं कीर्तन के माध्यम से भगवान भोलेनाथ की महिमा का गुणगान किया। सावन के पूरे माह नियमित रूप से बाबा की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं में राधेश्याम अग्रवाल, मनीष सोलंकी एवं डॉ. रामदेव अग्रवाल सहित अनेक भक्त मौजूद रहे।सहस्त्र घट अभिषेक के दौरान भगवान शिव का विशेष पूजन कर जड़ी-बूटियों एवं केसर जल से अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव की आरती की।महाआरती के बाद मंदिर परिसर में प्रसाद वितरण किया गया। भजन-कीर्तन के दौरान महिला एवं पुरुष श्रद्धालु भगवान शिव के भजनों पर झूम उठे और भक्ति भाव में विभोर दिखाई दिए। पूरे वातावरण में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंजते रहे।
पंडित गोविंद जोशी ने बताया कि रत्नेश्वर महादेव मंदिर सदियों पुराना एवं अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है। यहां श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से मन को शांति एवं आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है। सावन के पवित्र माह में भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक और पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।
उन्होंने कहा कि सावन माह भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा विभिन्न प्रकार के पूजन-अनुष्ठान करने से श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति की भावना बढ़ती है। इसी धार्मिक भावना के साथ रत्नेश्वर महादेव मंदिर में सहस्त्र घट अभिषेक का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सावन के अंतिम दिनों में आयोजित इस विशेष धार्मिक आयोजन ने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया।

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