वो चीखती रही, रहम की भीख मांगती रही, वो दरिंदगी करते रहे…स्लीपर बस में नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप की कहानी, याद आई निर्भया

नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट के बीच चलती बस में 4 अगस्त को 17 वर्षीय नाबालिग से कथित गैंगरेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना के सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि नाबालिग के साथ बस में डेढ़ घंटे से अधिक समय तक दरिंदगी की गई।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता नोएडा जाने के लिए बस में सवार हुई थी। ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर बस में सवार अन्य यात्री उतर गए। इसके बाद बस के कंडक्टर ने कथित तौर पर नाबालिग के साथ अश्लील हरकत शुरू कर दी। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। आरोप है कि इसके बाद बस में मौजूद संदीप और कुलदीप नाम के आरोपियों ने उसके साथ गैंगरेप किया।

बताया जा रहा है कि घटना के दौरान बस ग्रेटर नोएडा के परी चौक से सेक्टर-63 होते हुए दिल्ली की ओर बढ़ती रही। करीब 47 किलोमीटर के इस सफर में बस ग्रेटर नोएडा और नोएडा से होते हुए दिल्ली के कश्मीरी गेट तक पहुंची, लेकिन इस दौरान कथित तौर पर किसी पुलिसकर्मी ने बस की जांच नहीं की।

कश्मीरी गेट के पास पहुंचने के बाद पीड़िता को बस से उतार दिया गया। इसके बाद आरोपी बस को तिमारपुर स्थित बस पार्किंग में खड़ा कर वहां से फरार हो गए। पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए कश्मीरी गेट थाने पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने आरोपियों की पहचान की, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से उस बस की पहचान की, जिसमें कथित तौर पर वारदात हुई थी। इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस बस में डेढ़ घंटे से अधिक समय तक नाबालिग के साथ कथित तौर पर दरिंदगी होती रही, वह करीब 47 किलोमीटर का सफर बिना किसी पुलिस जांच के कैसे तय करती रही।

वहीं, घटना में इस्तेमाल बस की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि बस में पर्दे लगे हुए थे, जिससे अंदर की गतिविधियां बाहर से दिखाई नहीं दे रही थीं। वर्ष 2012 के निर्भया कांड के बाद सार्वजनिक और यात्री बसों में इस तरह के पर्दों तथा खिड़कियों को ढकने वाली व्यवस्थाओं को लेकर सख्ती की गई थी। इसका उद्देश्य बस के अंदर होने वाली गतिविधियों को बाहर से दिखाई देना और अपराधियों को पर्दे या अंधेरे की आड़ में वारदात करने से रोकना था।

नियमों के मुताबिक रात में संचालित होने वाली ऐसी बसों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि अंदर की गतिविधियां बाहर से नजर आ सकें। ऐसे में इस मामले ने बसों में नियमों के पालन और पुलिस पेट्रोलिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक चलने वाली इस बस पर रास्ते में किसी पुलिसकर्मी की नजर क्यों नहीं पड़ी और बस की जांच क्यों नहीं की गई।

Share it :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get free tips and resources right in your inbox, along with 10,000+ others

Categories

Latest Post