चट्टानों से जीवाश्म तक… डूंगर कॉलेज में विद्यार्थियों ने करीब से जानी पृथ्वी की कहानी

बीकानेर।06 अक्टूबर2026 l

अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस के अवसर पर राजकीय डूंगर महाविद्यालय के भूविज्ञान विभाग की ओर से भू-विविधता एवं भू-विरासत के संरक्षण को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में बनस्थली विद्यापीठ के भूविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भू-विविधता, भू-विरासत, शैल एवं खनिज, जीवाश्म, भू-आकृतियों तथा इनके संरक्षण के वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय महत्व की जानकारी दी गई।

वक्ताओं ने बताया कि भू-विविधता किसी क्षेत्र की प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा इसके संरक्षण के साथ-साथ इसके शैक्षणिक एवं पर्यटन महत्व को भी समझना आवश्यक है।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राजेन्द्र पुरोहित ने कहा कि “भू-विविधता किसी क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान और वैज्ञानिक विरासत का आधार है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की संयुक्त फील्ड गतिविधियां ज्ञान एवं अनुभव के आदान-प्रदान का प्रभावी माध्यम हैं।”

भूविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. देवेश खंडेलवाल ने कहा कि “बीकानेर एवं पश्चिमी राजस्थान का भूवैज्ञानिक परिदृश्य अत्यंत समृद्ध एवं विशिष्ट है। यहां की चट्टानें, खनिज, जीवाश्म एवं भू-आकृतियां हमारी महत्वपूर्ण भू-विरासत हैं। इनके वैज्ञानिक अध्ययन के साथ इनके संरक्षण के प्रति जागरूकता भी आवश्यक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भू-विज्ञान के व्यावहारिक एवं सामाजिक महत्व से जोड़ते हैं।” इसके पश्चात राजकीय डूंगर महाविद्यालय एवं बनस्थली विद्यापीठ के विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों की संयुक्त भूवैज्ञानिक फील्ड विजिट आयोजित की गई।

फील्ड विजिट के दौरान विभाग के डॉ. देवाराम मेघवाल तथा डॉ. प्रकाश गर्ग ने विभिन्न भूवैज्ञानिक एवं खनन दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों का भ्रमण करवाते हुए विद्यार्थियों को शैल प्रकारों, भूवैज्ञानिक संरचनाओं, अवसादी निक्षेपों, खनन गतिविधियों एवं विशिष्ट भू-आकृतिक विशेषताओं का प्रत्यक्ष अध्ययन कराया गया।

बनस्थली विद्यापीठ की ओर से डॉ. नगनगोम ममता देवी, डॉ. रेशमी एम.आर., श्री विवेक दीप एवं डॉ. सुशील कुमार ने कार्यक्रम एवं संयुक्त भूवैज्ञानिक फील्ड विजिट में सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने भू-विविधता एवं भू-विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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