बीकानेर, 19 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर बीकानेर के बंगाली मंदिर में सोमवार को दुर्गा अष्टमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और बंगाली संस्कृति की पारंपरिक छटा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही मंदिर में धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू हो गया, जो दिनभर जारी रहा। मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना, पारंपरिक अनुष्ठान, शंख वादन प्रतियोगिता, धुनी पूजा, महाआरती और श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिर परिसर मां दुर्गा के जयकारों और शंख ध्वनि से गूंज उठा। बंगाली समुदाय के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की तथा परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
सुबह बलि के साथ हुई कार्यक्रमों की शुरुआत
दुर्गा अष्टमी के अवसर पर बंगाली मंदिर में सुबह धार्मिक परंपरा के अनुसार बलि अनुष्ठान के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इसके बाद मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए गए। पूजा के लिए कोलकाता से आए पंडित काजोल चक्रवर्ती ने बंगाली परंपरा के अनुसार विधि-विधान से धार्मिक कार्यक्रम संपन्न करवाए।
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को कमल के फूल अर्पित किए तथा विभिन्न प्रकार के फलों का भोग लगाया। भक्तों ने मां के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया और दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही।
लाल पार वाली साड़ियों में पहुंचीं महिलाएं
दुर्गा अष्टमी के अवसर पर बंगाली समुदाय की महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक लाल पाड वाली साड़ियां पहनकर सोलह शृंगार के साथ मंदिर पहुंचीं। लाल किनारी वाली सफेद साड़ियों में सजी महिलाओं ने बंगाली संस्कृति और परंपरा की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
महिलाओं ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली की कामना की। पारंपरिक वेशभूषा, धार्मिक आस्था और उत्साह से मंदिर परिसर में विशेष आकर्षण देखने को मिला। महिलाओं ने एक-दूसरे को दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं दीं और पूरे श्रद्धाभाव से धार्मिक आयोजनों में भाग लिया।
महिलाओं और पुरुषों के बीच शंख वादन प्रतियोगिता
दुर्गा अष्टमी के अवसर पर मंदिर में बलिदान की परंपरा निभाई गई और शंख वादन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इसमें महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शंख की गूंज से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। बंगाली परंपरा में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान शंख वादन का विशेष महत्व है। प्रतियोगिता के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
शंख ध्वनि के बीच मां दुर्गा के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। इस आयोजन ने धार्मिक कार्यक्रमों में उत्साह के साथ बंगाली समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखा।
महिलाओं ने हाथों में मेहंदी लगाकर लिया भाग
दुर्गा अष्टमी के अवसर पर मंदिर पहुंचीं महिलाओं में पारंपरिक रीति-रिवाजों को लेकर विशेष उत्साह नजर आया। महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाकर तथा पारंपरिक बंगाली परिधान पहनकर धार्मिक आयोजनों में शामिल हुईं। सोलह शृंगार किए महिलाओं की उपस्थिति ने उत्सव की रौनक बढ़ा दी।
महिलाओं ने सामूहिक रूप से मां दुर्गा की आराधना की और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे दिन मंदिर में भक्ति, उल्लास और पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।
दोपहर में श्रद्धालुओं को वितरित किया प्रसाद
मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान दोपहर में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई। इस अवसर पर विशेष रूप से पूरी-सब्जी और चटनी तैयार की गई। मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं को श्रद्धापूर्वक प्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। धार्मिक आयोजनों में शामिल होने आए लोगों ने मां दुर्गा के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण कर सुख-समृद्धि की कामना की।
महाआरती के बाद हुई पारंपरिक धुनी पूजा
शाम को मां दुर्गा की महाआरती का विशेष आयोजन किया गया। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की आराधना की और जयकारे लगाए। इसके पश्चात बंगाली परंपरा के अनुसार धुनी पूजा आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
धुनी पूजा के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। शंख ध्वनि, आरती और मां दुर्गा के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना कर मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।
बंगाली संस्कृति और धार्मिक आस्था का दिखा संगम
दुर्गा अष्टमी के अवसर पर बंगाली मंदिर में सुबह से शाम तक आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पारंपरिक पूजा-पद्धति, लाल पार वाली साड़ियों में सजी महिलाओं, शंख वादन प्रतियोगिता, धुनी पूजा, महाआरती और प्रसाद वितरण ने पर्व को विशेष बना दिया।
नवरात्र के दौरान बंगाली समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला दुर्गा पूजा उत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता का भी प्रतीक है। बीकानेर के बंगाली मंदिर में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से बंगाली समुदाय ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को उत्साहपूर्वक जीवंत रखा। दिनभर चले धार्मिक आयोजनों के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी रही और पूरा वातावरण मां दुर्गा की भक्ति में सराबोर नजर आया।




