गुरुदेव तुलसी के महाप्रयाण दिवस पर आचार्यश्री महाश्रमण ने अर्पित की विनयांजलि, बीकानेर से लाडनूं पहुंचे हजारों श्रद्धालु, चित्र प्रदर्शनी लगाई


लाडनूं। करीब 37 वर्षों बाद जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के श्रद्धालुओं को योगक्षेम वर्ष का लाभ प्रदान करने वाले तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगलवार को सुधर्मा सभा में आयोजित प्रात:कालीन मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को आज के निर्धारित विषय ‘दयानुकम्पी रहेंÓ के माध्यम से मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि साधु के लिए पांच महाव्रतों के पालन की बात बताई गई। प्रथम अहिंसा महाव्रत है। किसी जीव को नहीं मारना, सभी जीवों के प्रति अहिंसा का भाव रखना यह दया की एक परिभाषा है। आचार्यश्री भिक्षु ने दया के संदर्भ में बताया कि जीव अपने आयुष्य के आधार पर जीवन जीता है, उसमें हम लोगों की कोई दया नहीं है। कोई मर जाए तो उसकी हिंसा के भागीदार भी आदमी नहीं होता। हां, जो जीवों को मारता है, वह हिंसा का भागीदार होता है। नहीं मारना, यह संकल्प कर लेना, भावना प्रकट कर देना, और इसका पालन करने वाला ही दयावान हो सकता है।

यही दया भी होती है। पाप आचरणों से आत्मा की रक्षा करना बहुत बड़ी दया होती है। आज दिनांक के अनुसार परम पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री तुलसी के महाप्रयाण का दिवस है। आज उनके महाप्रयाण को 29 वर्ष पूर्ण होने वाले हैं। कितनों ने उनकी वत्सलता भी देखी होगी। आज के दिन गुरुदेव तेरापंथ न्यास वाले भवन में पधारे थे। कुछ ऐसी स्थिति बनी, जब गुरुदेव का महाप्रयाण हो गया। वे हमारे धर्मसंघ के इतिहास में सर्वाधिक समय तक आचार्य बने रहने वाले आचार्य थे। सबसे छोटी उम्र में युवाचार्य और आचार्य बने। वे एकमात्र ऐसे आचार्य थे, जिन्होंने अपने आचार्य पद का भी विसर्जन कर दिया। आचार्यश्री तुलसी के महाप्रयाण दिवस के संदर्भ में बीकानेर गंगाशहर में आचार्यश्री तुलसी का समाधि स्थल ‘नैतिकता का शक्तिपीठÓ से करीब 2000 श्रद्धालु आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रहे। उपस्थित श्रद्धालुओं की ओर से आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष गणेश बोथरा ने अभिव्यक्ति दी। इस दौरान महावीर रांका एवं विनोद बाफना सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। उपस्थित श्रद्धालुओं की ओर से सुधर्मा सभा में ही आचार्यश्री तुलसी के जीवनकाल की महत्त्वपूर्ण चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई थी। कार्यक्रम के उपरान्त आचार्यश्री ने उस चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

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