राजगुरू महामण्डेलश्वर धनीनाथ गिरी, पंचमंदिर अधिष्ठाता स्वामी श्री विशोकानन्द जी भारती ने कहा कि वेद का अर्थ है आत्मा, परमात्मा सनातन है और परमात्मा ने श्रृष्टि के संचालन के लिये वेद का ज्ञान दिया। वेद अपरिवर्तनीय है। हमारी आज की शिक्षा प्रणाली भी वेद आधारित होनी चाहिये।
स्वामी जी ने ओम को सनातन, जैन, बौध आदि धर्माें का आधार बताया। उन्होनें कहा कि परमात्मा ने चार वर्णों की रचना की और क्षत्रीय को राष्ट्र रक्षा का दायित्व मिला। जिसे उन्होनें अगणित बलिदान देकर निभाया है। बीकानेर का राती घाटी युद्ध की विजय क्षात्र धर्म का आदर्श है। राती घाटी समिति ने इस युद्ध को राष्ट्रीय महत्व दिलाया है। हमारी सदैव प्रेरणा रहेगा।
इससे पूर्व रातीघाटी शोध एवं विकास समिति द्वारा निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महा मण्डलेश्वर राजगुरू स्वामी श्री विशोकानन्द जी भारती का दीक्षा स्वर्ण जयंती के उपलक्ष में अभिन्नदन किया। रातीघाटी समिति के अध्ययक्ष श्री नरेन्द्र सिंह बीका ने कहा कि स्वामी जी का रातीघाटी समिति पर सदा वरद हस्त रहा है। अतः आज आपकी दीक्षा के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में समिति आपका अभिन्नदन कर रही है।
समिति के संस्थापक महामंत्री श्री जानकी नारायण श्रीमाली जी ने स्वामी जी के व्यक्तितव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आपने विगत 34 वर्षों से श्री पंच मंदिर के अधिष्ठाता है और इस अवधि में आपने श्री पंचमंदिर और सनातन के उत्कर्ष हेतु अनथक श्रम किया है। आपने आचार्य महामण्डलेश्वर, निर्वाण पीठाधीश्वर के रूप में आज आप सम्पूर्ण भारत में बीकानेर का गौरव बढ़ा रहे हैं। आप शांकरी परम्परा के आधार पर धर्म प्रचार हेतु समर्पित है।
इसके पश्चात् श्री नरेन्द्र सिंह बीका, गोपाल सिंह शेखावत, जानकी नारायण श्रीमाली, मेघराज बोथरा, विजय कोचर, भंवर सिंह बीका, भवानी सिंह राठौड़, तेजमाल सिंह टांट, जेठूसिंह गहलोत, भीमसिंह राजपुरोहित, क्षत्रसैन सुथार, प्रदीप सिंह चैहान आदि कार्यकताओं ने अभिन्नदन पत्र, शौल, दुपट्टा, श्रीफल एवं मालाऐं पहनाकर स्वामी जी का बहुमान किया।
श्री जानकीनारायण श्रीमाली ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। समिति महामंत्री श्री ओमनारायण श्रीमाली ने सभी का आधार प्रकट किया।
ओमनारायण श्रीमाली
महामंत्री





