त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले रसोई के बजट पर महंगाई का दबाव बढ़ता दिख रहा है। प्याज और चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाई है, जबकि दाल, चावल, आटा और अन्य खाद्य पदार्थों के दामों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के 23 अगस्त के अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य के अनुसार, चावल 45.08 रुपये प्रति किलो रहा, जो एक महीने पहले 44.81 रुपये और एक साल पहले 42.66 रुपये था। पैक्ड सरसों तेल की औसत कीमत 197.82 रुपये प्रति किलो रही, जबकि एक महीने पहले यह 195.99 और एक साल पहले 187.98 रुपये थी। मूंगफली तेल 205.93 रुपये प्रति किलो रहा, जो एक साल पहले 186.77 रुपये था। चना दाल 85.88 रुपये प्रति किलो रही, जबकि आलू की औसत कीमत 21.94 रुपये रही, दोनों ही पिछले साल की तुलना में सस्ते हैं। तुअर दाल 122.11 रुपये, पैक्ड आयोडाइज्ड नमक 22.62 रुपये और आटा 37.64 रुपये प्रति किलो रहा। वहीं चीनी की कीमत में सबसे तेज उछाल आया है। इसकी औसत खुदरा कीमत 63.13 रुपये प्रति किलो पहुंच गई, जबकि एक महीने पहले यह 48.62 रुपये और एक साल पहले 46.30 रुपये थी। कुछ बाजारों में चीनी 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। प्याज की कीमत भी तेजी से बढ़ी है। इसका अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 42.08 रुपये प्रति किलो है, जो एक सप्ताह पहले 35.85 रुपये, एक महीने पहले 34.91 रुपये और एक साल पहले 28.41 रुपये था। दिल्ली में प्याज 65 रुपये और चेन्नई में करीब 58 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। मार्च-अप्रैल में महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से देर से आने वाली फसल और स्टोर किए गए प्याज को नुकसान पहुंचा, जबकि महंगे भंडारित रबी प्याज की आवक से भी बाजार में उपलब्ध आपूर्ति पर दबाव बढ़ा। महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है और 2024-25 में देश के कुल प्याज उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 44.07 फीसदी रही। मध्य प्रदेश 14.44 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। ऐसे में महाराष्ट्र में फसल या स्टॉक प्रभावित होने का सीधा असर देश के कई बाजारों में प्याज की कीमतों पर पड़ता है।




