ताहिर हुसैन के 7 साल के संघर्ष का असर, करणी औद्योगिक क्षेत्र में CETP निर्माण को रीको तैयार

बीकानेर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने करणी औद्योगिक क्षेत्र (विस्तार), बीकानेर में रीको द्वारा अपने व्यय पर कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराने के आदेश पारित किए हैं जो निस्संदेह अत्यंत प्रशंसनीय एवं स्वागत योग्य कदम है। एनजीटी के हडक़ाने के बाद रीको ने इस बाबत सूचना जारी की है। ऐसे में यहां यह जानना भी आवश्यक है कि जिस औद्योगिक अपशिष्ट जल के निस्तारण हेतु करणी औद्योगिक क्षेत्र की सभी औद्यौगिक संस्थाओं के निरंतर पुरजोर प्रयास के बावजूद रीको ने लगभग 15 वर्षों तक ढिठाई करते हुए कोई प्रभावी एवं ठोस कदम नहीं उठाए, उसी समस्या के समाधान के लिए आज वह अपने संसाधनों से सीईटीपी का निर्माण कराने के लिए कैसे तैयार हुआ। इसके पीछे सामाजिक कार्यकर्ता ताहिर हुसैन के सात वर्षों के सतत संघर्ष, अनुसंधान एवं प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ताहिर हुसैन द्वारा इस प्रकरण से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों, अभिलेखों एवं तथ्यों का संकलन कर रीको के विरुद्ध नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, भोपाल के समक्ष परिवाद संख्या व्। 83/2024 प्रस्तुत किया गया था। प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं तथ्यों पर विचार करने के उपरांत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिनांक 06.11.2025 को अपने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट रूप से यह घोषित किया कि करणी औद्योगिक क्षेत्र (विस्तार), बीकानेर में सीईटीपी का निर्माण कराना रीको की वैधानिक एवं विधिक जिम्मेदारी है। एनजीटी ने रीको को छह माह की अवधि में सीईटीपी निर्माण पूर्ण करने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं अन्य अनिवार्य शर्तों की अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, जिनमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्यक सहमतियां, वर्षा जल संचयन प्रणाली की स्थापना, ग्रीन बेल्ट का विकास तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु भूमि उपलब्ध कराना सम्मिलित था। अपनी आदत से मजबूर रीको ने पूर्व की भांति एनजीटी के इस फैसले को स्वीकार करने के बजाय इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील प्रस्तुत की। वहीं, ताहिर हुसैन ने देश के प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। परिणामस्वरूप, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश दिनांक 04.08.2026 द्वारा रीको की अपील को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि वह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिनांक 06.11.2025 के आदेश में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने का इच्छुक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा रीको की अपील खारिज किए जाने के पश्चात ताहिर हुसैन ने पुन: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष आदेश की अनुपालना सुनिश्चित कराने हेतु निष्पादन आवेदन प्रस्तुत किया, जिसकी सुनवाई दिनांक 06.10.2026 को निर्धारित है। इसी क्रम में संभावित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति एवं अन्य वैधानिक दायित्वों से बचने तथा न्यायिक आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रीको द्वारा करणी औद्योगिक क्षेत्र में अपने व्यय पर सीईटीपी का निर्माण कराया जा रहा है। साथ ही एनजीटी के निर्देशानुसार वर्षा जल संचयन प्रणाली, ग्रीन बेल्ट विकास एवं अन्य पर्यावरणीय अवसंरचना संबंधी कार्य भी किए जा रहे हैं। अत: इस महत्वपूर्ण पर्यावरणीय उपलब्धि के लिए बीकानेर के सामाजिक कार्यकर्ता ताहिर हुसैन के योगदान को भी स्मरण एवं सम्मान दिया जाना चाहिए, जिनके वर्षों के अथक संघर्ष, समय, संसाधनों एवं समर्पण के परिणामस्वरूप आज रीको को अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए सीईटीपी निर्माण के लिए आगे आना पड़ा है। यह उदाहरण दर्शाता है कि एक जागरूक नागरिक का सतत प्रयास न केवल प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित कर सकता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे व्यापक जनहित के उद्देश्यों को भी सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकता है।

Share it :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *